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The Jathedar of Sri Akal Takht has objected to several sections of the sacrilege law, giving the government a 15-day ultimatum.
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श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने बेअदबी कानून की कई धाराओं पर जताई आपत्ति, सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम
पंजाब सरकार के बेअदबी कानून पर विवाद गहराता जा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कानून की कई धाराओं पर गंभीर आपत्ति जताई और सरकार को 15 दिनों के भीतर संशोधन करने का अल्टीमेटम दिया है।
ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि सिख कौम बेअदबी करने वालों को सख्त सजा दिए जाने के पक्ष में है, लेकिन कानून में शामिल कुछ नई धाराएं सीधे तौर पर सिख रहित मर्यादा और धार्मिक परंपराओं में सरकारी दखल का रास्ता खोलती हैं, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना पंथक संस्थाओं से सलाह-मशविरा किए रातों-रात कैबिनेट में बिल पास कर इसे कानून का रूप दे दिया। उनका कहना था कि न तो इस एक्ट का ड्राफ्ट शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को भेजा गया और न ही श्री अकाल तख्त साहिब से कोई राय ली गई।
ज्ञानी गड़गज्ज ने एक्ट में “कस्टोडियन” की परिभाषा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून के तहत गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की देखरेख और सिख रहित मर्यादा के पालन की जिम्मेदारी तय की गई है तथा उल्लंघन होने पर पांच साल तक की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी घर में अखंड पाठ चल रहा हो और कोई शरारती तत्व बेअदबी की घटना कर दे, तो इस कानून के तहत घर के सदस्य, ग्रंथी सिंह या प्रबंधक कमेटी भी आरोपी बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस कारण लोगों में डर का माहौल बन रहा है और लोग गुरु घरों तथा अखंड पाठ जैसी धार्मिक परंपराओं से दूरी बनाने लगेंगे।
ज्ञानी गड़गज्ज ने गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को यूनिक नंबर देने और उनका रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड करने की शर्त का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार को सिखों की शब्दावली और धार्मिक परंपराओं में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। “बीड़” शब्द को बदलना पंथक इतिहास और मर्यादा के साथ छेड़छाड़ है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर सरकार ने विवादित धाराओं में संशोधन नहीं किया, तो पांच सिंह साहिबानों की बैठक बुलाकर सख्त फैसला लिया जाएगा।
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