नागौर में कलेक्टर का आदेश बेअसर दिख रहा है। एक साल से रास्ते के लिए दर-दर किसान व ग्रामीण भटक रहे हैं। यह मामला गांव रोल, सुजनियावास कटाणी का है। यहां अवैध अतिक्रमण की शिकायत को लेकर जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में दिए गए आदेश की तहसील प्रशासन द्वारा कथित तौर पर खुली अवहेलना किए जाने को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा है। पीड़ित ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि 21 मई 2026 को जिला कलेक्टर नागौर की जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों को तहसीलदार जायल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सात से दस दिन के अंदर रास्ता साफ करवाने का लिखित आश्वासन दिया था। लेकिन आज तक न तो पैमाइश हुई और न ही अतिक्रमण हटाया गया। एक जून को दिए गए लिखित आवेदन के बावजूद प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय रहा।
वर्तमान में कागजी नाप के अनुसार, रास्ते को दोनों तरफ से दबाकर मात्र 6-7 फीट कर दिया गया है। इससे किसानों के कृषि कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। नया सीजन शुरू होने वाला है, लेकिन ट्रैक्टर, थ्रेशर और अन्य उपकरण खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे। स्कूली बच्चों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे स्कूल वाहन गुजरने में मुश्किल होती है।
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पीड़ित पुखराज भाटी ने कहा कि एक साल से अपने खेत में जाने के लिए आम रास्ता नहीं है। मैं मुखराधिराज सरकार से कहना चाहता हूं कि पिछले एक साल से चक्कर काट रहा हूं, मगर मूर्खाधिराज सरकार के नुमाइंदे मेरा काम नहीं कर रहे। आप सुनो और मेरा काम करवाओ।
ग्रामीणों ने बताया कि वे इस मामले में अब तक जिला कलेक्टर के समक्ष दो बार, तहसीलदार के समक्ष दो बार और एसडीएम के समक्ष एक बार पेश हो चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़े संघर्ष और झगड़े का रूप ले सकता है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि तहसीलदार जायल द्वारा आदेशों की अवहेलना का संज्ञान लिया जाए और जिला स्तर से विशेष राजस्व टीम को पुलिस बल के साथ मौके पर भेजकर खसरा नंबर 169 का कागजी भौगोलिक नाप अनुसार पूरा चौड़ीकरण करवाया जाए।