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Video: अम्बेडकरनगर में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की उठी मांग, चुनाव में देरी को बताया कारण
त्रिस्तरीय पंचायतों के मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर अनिश्चितता के बीच जनप्रतिनिधियों ने कार्यकाल बढ़ाने की मांग उठाई है।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में देरी, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन लंबित होना तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया का पूरा न होना दर्शाता है कि सभी विधिक औपचारिकताएं अभी अधूरी हैं। ऐसे में जल्दबाजी में चुनाव कराना न तो न्यायसंगत होगा और न ही टिकाऊ साबित होगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण स्पष्ट संकेत देता है कि निर्धारित समय में पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा है। ऐसी स्थिति में यदि निर्वाचित पंचायतों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति की जाती है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा।
प्रतिनिधियों ने पूर्व के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि जब-जब पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए गए, तब पारदर्शिता की कमी, जवाबदेही का अभाव और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं, जिससे ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक विश्वास कमजोर हुआ।
इसके विपरीत, ग्राम प्रधान और अन्य पंचायत प्रतिनिधि सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जिससे वे जनता के प्रति जवाबदेह रहते हैं और स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हुए उनका समाधान करते हैं।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में सामान्य परिस्थितियों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही कार्यभार सौंपकर लोकतांत्रिक निरंतरता बनाए रखने के उदाहरण मौजूद हैं।
जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाया जाए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों सुचारू रूप से चल सकें।
इस दौरान सुमित, अप्रीतम नारायण, मनोज तिवारी, विजेंद्र यादव, दिलीप कुमार, शकुंतला देवी, रामकरन यादव, पारसनाथ, रामशरण, विजय प्रताप, कुसुमतला, प्रभावती देवी, कृष्ण कुमार, अमरीश पाल, दिनेश राजभर, वीरेंद्र यादव, अनिल ताऊ, मनोज सिंह और अमित कुमार गौड़ सहित कई प्रधान उपस्थित रहे।
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