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अमेठी में केले की आड़ में कछुओं की तस्करी, तीन तस्कर गिरफ्तार
यूपी के अमेठी में केले की आड़ में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने पिकअप से 1203 कछुआ बरामद किए हैं। साथ ही तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। बरामद कछुआ संरक्षित श्रेणी के हैं।
बरामद कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये बताई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कछुओं को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है।
मुंशीगंज थाना इंस्पेक्टर शिवाकांत त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार रात मुखबिर से सूचना मिली कि जगदीशपुर से एक पिकअप वाहन पर कछुओं को तस्करी के लिए वाराणसी ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही मुंशीगंज पुलिस ने मुसाफिरखाना-अमेठी मार्ग पर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की। इसी समय आई एक पिकअप को रुकने का इशारा किया। इस पर चालक वाहन लेकर भागने लगा। लेकिन, पुलिस ने पीछा करके उसे पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान पिकअप में केले लदे मिले। लेकिन, केलों के नीचे बोरों में कछुआ भरे रखे थे। पुलिस ने मौके से जगदीशपुर के पालपुर गांव निवासी रमेश और राजेश तथा श्रावस्ती निवासी वीरेंद्र विक्रम को हिरासत में लिया। पूछताछ में तीनों ने अलग-अलग स्थानों से कछुए एकत्र कर वाराणसी के रास्ते कोलकाता ले जाकर तस्करी करने की बात स्वीकार की।
मामले की सूचना वन विभाग को दी गई। वन दरोगा सुरेंद्र कुमार व उनकी टीम की मौजूदगी में जब पिकअप से 60 बोरे उतारे गए तो उनमें 1203 दुर्लभ प्रजाति के कछुआ पाए गए। वन अधिकारियों के अनुसार, कछुओं का कुल वजन करीब 15 क्विंटल है। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 60 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए। मुख्य आरोपी रमेश के खिलाफ पहले से भी कछुआ तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्रा ने बताया कि बरामद कछुआ संरक्षित श्रेणी में आते हैं। न्यायालय से अनुमति प्राप्त होने के बाद नियमानुसार सभी कछुओं को गोमती नदी में सुरक्षित रूप से प्रवाहित किया जाएगा।
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