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VIDEO: बॉयो गैस प्लांट : गोशाला संग आटा चक्की और एक्सपेलर को मिल रही बिजली
शुभम सिंह (अमेठी)। सिंहपुर ब्लॉक के खारा गांव में बॉयो गैस प्लांट से आटा और ऑयल मिल चलाने के साथ ही गोशाला को बिजली आपूर्ति दी जा रही है। इसी परिसर में लगी आटा व एक्सपेलर से ग्रामीणों को सस्ते दर पर आटा पिसाई और तेल पेराई का लाभ मिल रहा है। इससे होने वाली आमदनी को पंचायत के खाते में जमा कराया जा रहा है। इस रकम से गांव में विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2022–23 में 46 लाख रुपये से निर्मित गोबर गैस प्लांट में बन रही बिजली से आटा चक्की और ऑयल मिल का संचालन हो रहा है। जिसका लाभ आसपास के गांवों के परिवारों को मिल रहा है। बॉयो गैस प्लांट से ही कई ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध हो सका है। प्लांट से निकलने वाली स्लरी से प्राकृतिक खाद बनाने के साथ सीएनजी प्लांट लगाने की योजना पर भी काम चल रहा है।
इस तरह होता है प्लांट का संचालन
प्लांट के संचालक वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि गो आश्रय स्थल से नियमित रूप से गोबर इकट्ठा किया जाता है। बॉयो गैस डाइजेस्टर (संयंत्र) में गोबर को पानी के साथ मिलाकर डाला जाता है। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में बैक्टीरिया गोबर को विघटित करते हैं, जिससे मुख्य रूप से मीथेन गैस बनती है। इस गैस को पाइपलाइन के माध्यम से इंजन तक ले जाया जाता है। गैस से चलने वाले इंजन को ऑयल मिल और आटा चक्की से जोड़ा जाता है, जो आटा पीसने और स्पेलर से तेल निकालने के लिए यांत्रिक ऊर्जा पैदा करता है। इसी प्लांट से गो आश्रय स्थल की बिजली व्यवस्था भी संचालित की जाती है। पड़रावां गांव निवासी छविनाथ बताते हैं कि बाहर तीन रुपये प्रति किलो की दर से आटे की पिसाई ली जाती है जबकि बायोगैस प्लांट से संचालित आटा मिल में एक रुपया प्रति किलो पिसाई देनी पड़ती है।
10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह हो रही आमदनी
ऑपरेटर वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि हर माह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आय आटा मिल और स्पेलर से हो जाती है। इन्हीं पैसे से से सरसों की खली भी खरीद कर रख ली जाती है। मेंटीनेंस आदि में खर्च करने के बाद जो भी पैसा बचता है वह ग्राम पंचायत खारा के खाते में जमा कर दिया जाता है ।
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