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विश्व डॉल्फिन दिवस पर सरयू नहर में फंसी डॉल्फिन, वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ की टीम रेस्क्यू में जुटी
विश्व डॉल्फिन दिवस पर बहराइच जिले से एक संवेदनशील दृश्य सामने आया है। यहां शनिवार देर शाम कतर्नियाघाट रेंज के चौधरी चरण सिंह घाघरा बैराज के निकट सरयू नहर में कम पानी के बीच एक गैंगेटिक डॉल्फिन फंसी मिली। यह वही डॉल्फिन है, जिसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है। इसकी संख्या लगातार घट रही है।
बैराज से निकलने वाली नहर शाखा में ग्रामीणों ने डॉल्फिन को छटपटाते देखा तो वन विभाग को सूचना दी। वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने मौके पर वनकर्मियों की टीम भेजी। लेकिन, अंधेरा होने के चलते रात में रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका। रविवार की सुबह वन विभाग की टीम ने विश्व प्रकृति निधि (डब्लूडब्लूएफ) की विशेषज्ञ टीम के साथ मिलकर नाव के माध्यम से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। डॉल्फिन को बैराज की ओर वापस भगाने की कोशिश की गई। लेकिन, नहर में पानी कम होने से टीम को सफलता नहीं मिल सकी है।
डब्लूडब्लूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि दो दिन पूर्व बैराज पर सरयू नहर के सभी गेट बंद कर दिए गए। इससे नहर का जलस्तर काफी घट गया। इसी दौरान यह डॉल्फिन नहर में फंस गई। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ की संयुक्त टीम लगातार रेस्क्यू में जुटी हुई है।
उन्होंने बताया कि डॉल्फिन को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। आज विश्व डॉल्फिन दिवस भी है, इसलिए इस रेस्क्यू अभियान को हम विशेष रूप से मिशन मोड में चला रहे हैं। जब तक डॉल्फिन सुरक्षित नहीं हो जाती, अभियान जारी रहेगा। रेस्क्यू अभियान में डब्लूडब्लूएफ के फील्ड असिस्टेंट मंसूर अली, वन दरोगा अवनीश कुमार, वन रक्षक अब्दुल सलाम, अन्नू शुक्ला, लक्ष्मण, गुलाम अहमद, कामता प्रसाद सहित कई वनकर्मी शामिल हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सरयू नहर में कई बार गैंगेटिक डॉल्फिन देखी जा चुकी हैं। लेकिन, इस बार कम जलस्तर के कारण यह दुर्लभ जलीय जीव फंस गया है। ग्रामीण भी डॉल्फिन को बचाने के लिए विभागीय टीम की सहायता में जुटे हैं। वन विभाग का कहा है कि यदि नहर में पानी छोड़ा गया तो डॉल्फिन को बैराज की ओर सुरक्षित निकालना आसान होगा। फिलहाल, टीम लगातार निगरानी कर रही है। बैराज के अधिकारियों से भी संपर्क साधा जा रहा है।
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