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VIDEO: भीमेश्वर से भंवरेश्वर बन गए बाबा भोलेनाथ, तीन जिलों के सरहद पर सई नदी के किनारे स्थित है भवरेश्वर मंदिर
लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की सीमा पर बछरावां इलाके के सुदौली गांव स्थित सई नदी किनारे स्थित भंवरेश्वर महादेव मंदिर शिव भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रत्येक सोमवार तथा सावन माह और शिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है। सावन के दूसरे सोमवार के एक दिन पहले रविवार को भक्तों ने मंदिर पहुंचकर पूजापाठ के साथ जलाभिषेक किया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापरयुग में पांडव जब कौरवों के साथ चौसर में हार गए। उन्हें 12 वर्ष का वनवास व एक वर्ष का अज्ञातवास भुगतना पड़ा था। भ्रमण के दौरान पांडव सई नदी के किनारे इस क्षेत्र में पहुंचे थे। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती की शिव-पूजा के लिए भीम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। मुगलकाल में औरंगजेब की सेना की ओर से इसे क्षति पहुंचाने का प्रयास करते हैं। इसी दौरान भंवरे मुगल सेना पर हमला कर देते हैं और सेना को जान बचाकर भागना पड़ता है।
इस घटना के बाद से मंदिर का नाम भंवरेश्वर मंदिर पड़ गया है। मंदिर पुजारी सुनील बाबा ने बताया कि सावन माह में इस मंदिर की महत्ता बढ़ जाती है। रायबरेली ही नहीं, बल्कि लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी के भक्त यहां पर जलाभिषेक करने आते हैं। सावन माह के सोमवार के दिन दो से तीन लाख भक्त यहां पर जलाभिषेक करते हैं।
रविवार को भी सुबह से ही पूजापाठ और जलाभिषेक के लिए मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त यहां आए। महेंद्र कुमार बताते हैं कि सई नदी से जल भरने के बाद भक्त मंदिर में जाकर जलाभिषेक करते हैं। यहां पर सच्चे मन से मांगी गई मुरादें भगवान शंकर पूरी करते हैं।
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