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VIDEO : 33 साल पहले शुरू हुई ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कानूनी लड़ाई, कल फिर सुनवाई
वाराणसी की सिविल कोर्ट में ज्ञानवापी के मसले को लेकर 15 अक्टूबर 1991 को प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ का केस दाखिल किया गया था। इस मुकदमे के मूल वादी पंडित सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय का निधन हो चुका है।
मौजूदा समय में लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ की ओर से उनके वाद मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी मुकदमे की पैरवी अदालत में कर रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुकदमे का निस्तारण छह महीने में करने का आदेश दिया है। इस मुकदमे की मुख्य प्रतिवादी ज्ञानवापी के मौजूदा ढांचे की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी है।
लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी की मांग है कि संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का एएसआई सर्वे कर बताए कि ज्ञानवापी का धार्मिक स्वरूप क्या था। मसाजिद कमेटी की दलील है कि जब एएसआई एक बार सर्वे कर चुकी है और उसकी रिपोर्ट पर अभी तक आपत्ति भी नहीं दाखिल हुई तो दोबारा सर्वे की मांग क्यों...?
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