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VIDEO: यमुनोत्री धाम की पैदल यात्रा पर निकले बाड़ाहाट क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता
बाड़ाहाट क्षेत्र के आराध्य देव कंडार देवता की पारंपरिक यमुनोत्री धाम यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गई। देव डोली के यात्रा पर निकलते ही क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो उठा। सात दिन तक चलने वाली इस धार्मिक पैदल यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मार्ग में जयकारों तथा पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज सुनाई दी।
परंपरा के अनुसार कंडार देवता की डोली विशेष पूजा अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपने मूल मंदिर संग्राली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। इस दौरान ग्रामीण ढोल-दमाऊं और रणसिंघा की धुन पर नाचते-गाते हुए यात्रा में आगे बढ़े। यात्रा मार्ग के विभिन्न गांवों में देव डोली का भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने फूलमालाओं, आरती और प्रसाद वितरण के साथ देवता का आशीर्वाद लिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए भोजन और विश्राम की भी व्यवस्था की गई। पूरी यात्रा के दौरान क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और आस्था का विशेष माहौल बना रहा। कंडार देवता मंदिर समिति के अध्यक्ष विनोद नेगी, पूर्व सभासद देवेंद्र चौहान, हंसराज चौहान, दिवाकर नैथानी आदि ने बताया कि कंडार देवता बाड़ाहाट क्षेत्र के आराध्य देव हैं। साथ ही कंडार देवता 14 साल बाद यमुनोत्री धाम की पैदल यात्रा पर निकले हैं। यात्रा का प्रथम पड़ाव कंवा गांव में है। इसके बाद यात्रा कुथनौर गांव में विश्राम करेगी। जिसके बाद मां यमुना के मायके खरसाली गांव के साथ ही गंगा दशहरे पर यमुनोत्री धाम पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा पुन: वापस पींडकी मदेश, गजोली गांव होते हुए संग्राली गांव पहुंचेगी। कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं। वहीं, श्रद्धालुओं का कहना है कि देव यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम भी है। सात दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु कठिन पैदल मार्ग तय करते हुए भक्ति और आस्था के साथ यमुनोत्री धाम पहुंचेंगे।
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