एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्च्युरी के कुनबे में गुरुवार को 1225 घड़ियाल और शामिल हो गए। मदर कॉल (नेस्ट से आने वाली सरसराहट की आवाज) पर पहुंची मादा ने बालू हटाई तो अंडों से बाहर निकले बच्चों ने चंबल नदी का रुख किया। नदी में नर घड़ियाल ने बच्चों की अगवानी की। 65 से 70 दिन का अंडे सेने का समय शुरू होने पर वन विभाग ने घोंसलों पर लगी जाली हटा दी थी। आगरा के बाह रेंज के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि रेहा से उदयपुर खुर्द तक 18 स्थलों पर घोंसले बनाए गए थे। 1225 घड़ियालों का जन्म हुआ है। वनकर्मियों की निगरानी में घड़ियाल शिशु चंबल नदी में पहुंचा गए हैं। उन्होंने बताया कि घड़ियाल के साथ ही मगरमच्छ की हैचिंग की वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। समय से पहले हैचिंग का दौर शुरू होने के पीछे बढ़ा हुआ तापमान अहम वजह माना जा रहा है।
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घड़ियालों का बढ़ा कुनबा: अंडों से निकल चंबल की गोद में पहुंचे 1225 नन्हे घड़ियाल, देखें अद्भुत तस्वीरें
Fri, 04 Jun 2021 12:40 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 04 Jun 2021 12:40 AM IST
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चंबल नदी में छोड़े गए घड़ियाल
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अंडों से निकलते घड़ियाल के बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
कुकरैल ले जाए गए थे 699 अंडे
बाह रेंज में घड़ियालों ने नदी की बालू में 1924 अंडे दिये थे। जिनमें से 699 अंडे कुकरैल प्रजनन केन्द्र लखनऊ ले जाए गए थे। रेंजर ने बताया कि विशेषज्ञों की देखरेख में हैचिंग होगी। घड़ियालों के वयस्क होने पर चंबल नदी में छोड़ा जाएगा।
बाह रेंज में घड़ियालों ने नदी की बालू में 1924 अंडे दिये थे। जिनमें से 699 अंडे कुकरैल प्रजनन केन्द्र लखनऊ ले जाए गए थे। रेंजर ने बताया कि विशेषज्ञों की देखरेख में हैचिंग होगी। घड़ियालों के वयस्क होने पर चंबल नदी में छोड़ा जाएगा।
चंबल नदी में छोड़े गए घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
घड़ियाल शिशुओं को जिंदा रखने का प्रयास
घड़ियाल शिशुओं में से करीब 2 से 3 प्रतिशत तक ही जीवित रह पाते हैं। घड़ियाल शिशुओं को बड़ी मछली, बगुले जैसे पक्षी तो खा ही लेते हैं। बाढ़ से सर्वाधिक नुकसान होता है। बाढ़ में बह कर चंबल के खादर में पहुंचने वाले घड़ियाल शिशुओं को बिषखांपर, सांभर, सियार आदि खा लेते है। रेंजर ने बताया कि घड़ियाल शिशुओं को बचाने के लिए वन विभाग की टीम उनके विचरण की निगरानी करेगी।
घड़ियाल शिशुओं में से करीब 2 से 3 प्रतिशत तक ही जीवित रह पाते हैं। घड़ियाल शिशुओं को बड़ी मछली, बगुले जैसे पक्षी तो खा ही लेते हैं। बाढ़ से सर्वाधिक नुकसान होता है। बाढ़ में बह कर चंबल के खादर में पहुंचने वाले घड़ियाल शिशुओं को बिषखांपर, सांभर, सियार आदि खा लेते है। रेंजर ने बताया कि घड़ियाल शिशुओं को बचाने के लिए वन विभाग की टीम उनके विचरण की निगरानी करेगी।
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
तीन महीने तक भोजन की जरूरत नहीं
घड़ियाल शिशुओं को तीन महीने तक भोजन की जरूरत नहीं होती है। स्वस्थ अंडे का वजन 112 ग्राम होता है। रेंजर ने बताया कि घोंसले की बालू की ऊपरी सतह का तापमान 45 और निचली सतह का 33 डिग्री सेल्सियस के करीब होता है। आमतौर पर मध्य जून में हैचिंग होती है, इस बार गर्मी का पारा चढ़ने की वजह से समय से पहले हैचिंग हुई है।
घड़ियाल शिशुओं को तीन महीने तक भोजन की जरूरत नहीं होती है। स्वस्थ अंडे का वजन 112 ग्राम होता है। रेंजर ने बताया कि घोंसले की बालू की ऊपरी सतह का तापमान 45 और निचली सतह का 33 डिग्री सेल्सियस के करीब होता है। आमतौर पर मध्य जून में हैचिंग होती है, इस बार गर्मी का पारा चढ़ने की वजह से समय से पहले हैचिंग हुई है।
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चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में घड़ियालों की प्रजाति संकट में है। घड़ियालों की 80 फीसदी आबादी चंबल में मौजूद है। हर साल इनकी संख्या बढ़ रही है। पिछले साल गणना में 1,876 घड़ियाल मिले थे। चंबल नदी में वर्ष 1979 से घड़ियालों का संरक्षण हो रहा है।