यमुना नदी में बीते साल लॉकडाउन और इस बार कोरोना कर्फ्यू के बाद भी प्रदूषण लगातार बढ़ता गया। महज छह महीने के अंदर ही यमुना नदी में ताजमहल के पीछे दो गुना ज्यादा प्रदूषण बढ़ गया। नगला बूढ़ी, भैंरो नाला और मंटोला नाला के जरिए यमुना नदी में सीवर सीधे पहुंचता रहा, जिसे हालात विकराल बना दिए हैं। इन छह महीनों में वीए टेक वबाग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कागजी रिपोर्ट सौंपता रहा, लेकिन नदी में प्रदूषण और सीवर की मात्रा 6 महीने में ही दोगुनी हो गई, जबकि कंपनी सभी एसटीपी चालू होने का दावा करती रही है। वीए टेक वबाग को शासन द्वारा आगरा के एसटीपी और पंपिंग स्टेशन का संचालन सौंपा गया है, लेकिन जब भी किसी अधिकारी या टीम ने निरीक्षण किया तो वबाग द्वारा संचालित पंपिंग स्टेशन बंद मिले और नाले का उत्प्रवाह सीधे यमुना नदी में गिरता हुआ मिला। मंडलायुक्त, डीएम, नगर आयुक्त, मेयर और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आई टीम के सदस्य एमसी मेहता और नीरी के वैज्ञानिकों के निरीक्षण में पंपिंग स्टेशन बंद मिले।
कब होगा यमुना का उद्धार: छह महीने में दो गुना हो गया यमुना का प्रदूषण, नदी में पहुंचते रहे सीवर
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कैलाश से ताज तक डी-सिल्टिंग की मांग
यमुना नदी में कैलाश घाट से ताजमहल के बीच प्रदूषण के विकराल हालात देखकर नेशनल चैंबर ने नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग की मांग दोहराई है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नेशनल चैंबर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने मथुरा की सांसद हेमा मालिनी और जल संसाधन मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि मथुरा के साथ आगरा में भी यमुना नदी की सफाई का काम शुरू कराया जाए। जरूरत पड़ी तो नेशनल चैंबर एनजीटी में भी इस मामले में पक्ष रखेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से ड्रेजर मशीन आगरा भेजने की मांग की, जिसे गोमती नदी की सफाई के लिए आगरा से लखनऊ भेज दिया गया था।
नवंबर 6 16 54000 21000
दिसंबर 4.7 17.2 79000 33000
जनवरी 4.6 20 92000 35000
फरवरी 5.8 14.4 92000 35000
मार्च 5.8 13.2 92000 30000
अप्रैल 5.8 14 90000 31000
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