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Dussehra 2022: विजयदशमी पर आगरा और मथुरा में हुई रावण की पूजा, पुतला दहन बंद करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा / मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 05 Oct 2022 04:18 PM IST
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मथुरा में रावण स्वरूप की पूजा करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा में लंकेश भक्त मंडल ने विजयदशमी पर्व पर बुधवार को यमुना तलहटी स्थित शिव मंदिर में दशानन रावण की पूजा अर्चना की। रावण के स्वरूप की महाआरती की गई। लंकेश भक्त मंडल ने पुतला दहन करने की प्रथा को बंद करने की सरकार से मांग की। हर वर्ष रावण के पुतला दहन की प्रथा को भगवान श्रीराम के आदर्शों का अपमान बताया गया। लंकेश भक्त मंडल द्वारा रामलीला मैदान में रावण का भव्य मंदिर बनवाने के लिए तैयारी भी की जा रही है।
उधर, आगरा के रामलाल आश्रम में रावण के वंशज माने जाने वाले सारस्वत ब्राह्मण समाज के लोग ने भी लंकापति का पूजन किया। इन लोगों ने रावण का रूप धारण कर कन्या पूजन किया। भगवान शंकर की आरती उतारी और हवन कर लोगों से अपील की कि रावण का पुतला दहन न करें। उन्होंने रावण को महाज्ञानी स्त्री का सम्मान करने वाला कुलसंरक्षक और महान संत बताया।
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भगवान शिव की पूजा करते रावण के स्वरूप
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के यमुना पार स्थित पुल के पास यमुना तलहटी में बने शिव मंदिर में दशहरा के अवसर पर रावण के स्वरूप ने पहले महादेव जी का अभिषेक किया। इसके बाद लंकेश भक्त मंडल ने दशानन की पूजा अर्चना कर महा आरती की। लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने कहा कि भगवान शिव के भक्त रावण का पुतला दहन नहीं करना चाहिए। रावण की विद्वता को मानकर श्रीराम ने उनसे लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए सेतु बंधु रामेश्वरम स्थापना के समय पूजा कराई थी। लंका पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद लिया था।
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लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट
- फोटो : ANI
ओमवीर सारस्वत ने कहा कि समाज के चंद लोग हर साल रावण का पुतला दहन कर भगवान श्रीराम का अपमान करते हैं। भगवान श्रीराम के आदर्शों को मानकर हमें पुतला दहन करने की कुप्रथा पर तुरंत रोक लगा देनी चाहिए। हिंदू संस्कृति में एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार एक बार ही होता है। किसी मरे हुए व्यक्ति का पुतला दहन नहीं होता है।
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आगरा में भी हुई रावण की पूजा
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के रामलाल आश्रम में लंकापति दशानन रावण महाराज पूजा आयोजन समिति ने दशानन एवं महादेव की पूजा अर्चना हवन कर आरती की। इसके बाद रावण के स्वरूप ने कन्या पूजन किया। लोगों को नारी सम्मान करने के लिए प्रेरित किया। पुतला दहन का विरोध कर देशवासियों से प्रथा को मिटाने के लिए आगे आने का आह्वान किया गया। उन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए भी ऐसा न किए जाने की अपील की।
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आगरा में रावण के स्वरूप की पूजा करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
पूजा समिति संयोजक डॉ.मदन मोहन शर्मा और अध्यक्ष एडवोकेट उमाकांत सारस्वत ने कहा कि भगवान राम ने सेतु बंधु रामेश्वरम की स्थापना करते समय पूजन की क्रिया स्वयं दशानन रावण से कराई थी। उनका वंदन कर लंका पर विजय का आशीर्वाद लिया था।
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