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वृंदावन: बांकेबिहारी मंदिर में चढ़ाए गए फूलों से महक रही विधवा माताओं की कुटिया, बना रहीं धूपबत्ती
न्यूज डेस्क अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 07 Aug 2021 12:21 AM IST
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आश्रम सदन में फूलों की छंटाई करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा के वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी के शृंगार के फूलों की खुशबू से चैतन्य विहार स्थित विधवा माताओं की कुटिया (महिला आश्रम सदन) महक रही है। ठाकुर जी के शृंगार में प्रयुक्त फूल यहां एकत्रित करने का काम एक बार फिर शुरू हो गया है, जिससे धूपबत्ती बनाने का काम किया जा रहा है। यह काम भी माताएं ही कर रही हैं।
पिछले करीब डेढ़ माह से श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित वृंदावन के प्रमुख सभी मंदिरों में फूलबंगला सजाए जा रहे हैं। ठाकुरजी का शृंगार खास फूलों से किया जाता है। इसमें विशेष इत्र का उपयोग भी होता है। खासकर श्री बांकेबिहारी मंदिर में फूलबंगला की आभा देखते ही बनती है। इसके अलावा भी मंदिरों में भक्त अपने आराध्य को फूल अपर्ति करते हैं।
बांकेबिहारी मंदिर में फूलबंगले की सजावट
- फोटो : अमर उजाला
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्मी के मौसम में ठाकुर जी को शीतलता प्रदान करने के लिए फूलबंगले बनाए जाते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन वृंदावन के मंदिरों में सेवायत और भक्त करते हैं।
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आश्रम सदन में फूलों की छंटाई करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी के शृंगार के बाद उतरने वाले फूलों को ब्रज गंधा प्रोजेक्ट के तहत एकत्रित कर चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन ले जाया जा रहा है। यहां मंदिरों से पहुंचे फूलों को पश्चिम बंगाल की माताओं द्वारा अलग-अलग कर धूप में सुखाया जा रहा है। इससे आश्रय सदन का पूरा परिसर फूलों से सुगंधित हो रहा है।
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आश्रम सदन में सूख रहे फूल
- फोटो : अमर उजाला
श्रीबांकेबिहारी के शृंगार के बाद अनेक प्रकार के फूल विदेशी यहां पहुंच रहे हैं, जिनकी पहचान विधवा माताओं को भी नहीं है। कई दिन की प्रक्रिया के बाद इन्हीं फूलों को धूप के बाद मशीन में भी सुखाया जाएगा। इसके बाद मशीन की सहायता से उक्त फूलों की धूपबत्ती तैयार की जाएगी।
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आश्रम सदन में सूख रहे फूल
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज गंधा प्रोजेक्ट के प्रबंधक विक्रम शिवपुरी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण मंदिर से फूलों का आना बंद हो गया था। अब फिर से ठाकुर जी पर फूल चढ़ने लगे हैं। बांकेबिहारी मंदिर से एकत्रित फूलों की फिलहाल छंटाई और उन्हें मौसम के अनुसार सुखाया जा रहा है। मौसम बदलने के बाद इन फूलों से धूपबत्ती बनाई जाएंगी।
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