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शहादत को सलाम : तिरंगे में लिपटकर आए शहीद पिंकू, नौ माह के बेटे ने दी मुखाग्नि तो रो पड़े ग्रामीण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
Published by: Dimple Sirohi
Updated Mon, 29 Mar 2021 04:49 PM IST
सार
- नौ माह के बेटे ने दी मुखाग्नि तो रो पड़े ग्रामीण
- हर कोई शहीद के अंतिम दर्शनों को दिखाई दिया आतुर
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शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीण
- फोटो : amar ujala
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दक्षिण कश्मीर में शोपियां इलाके के वनगाम में आतंकियों से लोहा लेते हुए शनिवार रात शहीद हुए बागपत के लुहारी गांव के लाल पिंकू कुमार का पार्थिव शरीर सोमवार को गांव में पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग वीर सपूत के अंतिम दर्शन को गांव में पहुंच गए।
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान पूरा वातावरण भारत माता के जयकारों से गूंजता रहा। वहीं गांव में दुल्हैंडी का त्योहार नहीं मनाया गया।
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शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीण
- फोटो : amar ujala
गांव में होली के गीतों की बजाय भारत माता की जय, वंदेमातरम और शहीद पिंकू कुमार अमर रहें का उद्घोष गूंजता रहा। गमगीन माहौल के बीच शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को विदाई देते हुए हर किसी की आंख नम हो गई।
सांसद डाॅ. सत्यपाल मलिक, डीएम राजकमल यादव, एसपी अभिषेक सिंह भी गांव पहुंचे और शहीद को श्रद्धांजलि दी। सरकार की ओर से घोषित 50 लाख की आर्थिक सहायता में से 15 लाख का चेक शोकाकुल परिजनों को सौंपा।
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शहीद का सलामी देते सेना के जवान
- फोटो : amar ujala
आतंकियों के साथ मुठभेड़ में लुहारी गांव निवासी पिंकू कुमार शनिवार रात शहीद हो गए थे। शनिवार को शहीद का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर लेकर साथी जवान लुहारी पहुंचे तो अंतिम दर्शनों को हजारों की संख्या में लोग पहले ही मौजूद थे। जिनके भारत माता की जय, वंदेमातरम, शहीद पिंकू कुमार अमर रहे के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। हर कोई शहीद के अंतिम दर्शनों को आतुर था।
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शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोग
- फोटो : amar ujala
शहीद के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी कविता और मां कमलेश देवी पिंकू कुमार का पार्थिव शरीर देखकर बेसुध हो गई। बेटी शैली और अंजलि भी पिता के अंतिम दर्शनों के वक्त फफक कर रो पड़ीं।
परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला। पिता जबर सिंह और भाई मनोज कुमार के आंसू भी पिंकू कुमार के अंतिम दर्शन के वक्त नहीं थम सके। ग्रामीणों ने उन्हें ढांढस बंधाया। सेना के जवानों ने शहीद को अंतिम विदाई दी।
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शहीद की पत्नी नौ माह के बेटे के साथ
- फोटो : amar ujala
नौ माह के बेटे ने दी मुखाग्नि तो रो पड़े सब
अपने पिता को मुखग्नि देते हुए नौ माह का अर्णव पूरे घटनाक्रम से अंजान रहा। उसे पता भी नहीं था कि उसके पापा अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। पिंकू कुमार के भाई मनोज ने उसे गोद में लेकर पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दिलवाई। यह देखकर वहां मौजूद सभी लोग रो पड़े।
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