सब्सक्राइब करें

तमिलनाडु से लौटा परिवार, न राशन मिला न मनरेगा में काम, भाईयों को भूख से बिलखता देख बोली बहन-मेरा लैपटाप बेच दो

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 12 Jun 2020 11:18 AM IST
विज्ञापन
lockdown's truth: Seeing the brothers crying with hunger, the sister said, sell my laptop
तमिलनाडु से लौटा प्रवासी श्रमिक परिवार के साथ - फोटो : amar ujala
कोरोना वायरस से बचने के लिए किए गए लॉकडाउन की मार गरीबों मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों पर सबसे अधिक पड़ी है। दूसरे राज्यों से लौटे प्रवासी श्रमिकों को न काम मिल रहा है न पेट भरने के लिए खाना। बच्चे भूख से बिलखने के लिए मजबूर है। प्रवासियों को राशन और मनरेगा में काम भले ही कागजों में मिल रहा हो पर असल में कईयों के घरों में ताे चूल्हा भी नहीं जला है।


 
Trending Videos
lockdown's truth: Seeing the brothers crying with hunger, the sister said, sell my laptop
प्रवासी मजदूर के परिवार को नहीं नसीब हो रहा एक टाइम का खाना - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कन्नौज में लॉकडाउन के दौरान तमिलनाडु से लौटे प्रवासी परिवार को गांव में न मुफ्त राशन मिला और न ही मनरेगा में काम। बच्चों की भूख से बिलखते देख मां ने आधे दाम में तोड़िया बाजार में बेच दीं। कन्नौज के फत्तेहपुर जसोदा निवासी श्रीराम अपनी शादी के कुछ समय बाद पत्नी गुड्डी देवी को लेकर तमिलनाडु के किड्डलोर चला गया था।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
lockdown's truth: Seeing the brothers crying with hunger, the sister said, sell my laptop
घर में नहीं जला चूल्हा - फोटो : amar ujala
वहां वह करीब 30 साल से कुल्फी बेचने का काम कर रहा था। इससे पति, पत्नी और नौ बच्चों का गुजारा चल रहा था। लॉकडाउन में काम बंद होने से 18 मई को श्रीराम पत्नी और बच्चों को लेकर ट्रेन से गांव लौट आया। भूमिहीन श्रीराम का यहां राशनकार्ड भी नहीं है। उसने आरोप लगाया कि कोटेदार ने राशन और प्रधान ने मनरेगा में रोजगार देने से इंकार कर दिया।

 
lockdown's truth: Seeing the brothers crying with hunger, the sister said, sell my laptop
पेट भूखा पर चेहरे पर मुस्कान - फोटो : amar ujala
काम न होने से परिवार के सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया। कहीं से कोई मदद नहीं मिली तो गुड्डी देवी ने दो जून को तीन हजार की तोड़िया 1500 रुपये में बेच दी। इन पैसों से राशन लाकर बच्चों को खाना खिलाया। श्रीराम ने बताया कि अब खेतों में परिवार के साथ मजदूरी पर भुट्टा तोड़ने का काम कर रहा है। इसी से ही जैसे तैसे खर्च चल रहा है।

 
विज्ञापन
lockdown's truth: Seeing the brothers crying with hunger, the sister said, sell my laptop
खाने को नहीं मिल रहा खाना - फोटो : amar ujala
गांव में किसी तरह की सरकारी योजना का लाभ न मिलने का मलाल है। ट्रेन चालू होते ही परिवार के साथ तमिलनाडु लौट जाएंगे। ग्राम प्रधान आशा देवी का कहना है कि श्रीराम ने उनसे संपर्क नहीं किया है। उसका मनरेगा जॉबकार्ड बनवाने के साथ अन्य योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed