वसंत पंचमी के तीसरे और आखिरी शाही स्नान के बाद सोमवार से अखाड़ों में नागा संन्यासियों, बैरागियों और उदासीन परंपरा के साधु-संतों की विदाई शुरू हो गई। अब सभी 13 अखाड़ों के नागा साधु 2022 के हरिद्वार कुंभ में मिलेंगे। नागाओं के शिविर समेटे जाने लगे हैं। महाशिवरात्रि तक चलने वाले कुंभ मेले से अखाड़ों के संतों और नागाओं की रवानगी के साथ ही सुबह से शाम तक सैकड़ों शिविर उखाड़ लिए गए। जहां नागाओं के धूनों पर देश-दुनिया के आस्थावानों, पर्यटकों का मजमा लगा रहता था, वहां शाम को सूना-सूना सा माहौल दिखा। अब महीने भर काशी में मोक्षदायिनी गंगा के तट पर नागाओं का प्रवास होगा।
कुंभ 2019: तीसरे शाही स्नान के बाद अब काशी की बारी, तस्वीरों में देखें नागाओं के जाने की तैयारी
सेक्टर-16 में तरह-तरह के वेश बाना वाले भस्मी-भभूत पोते नागाओं के शिविर उतरने लगे हैं। ट्रकों, जीवों व अन्य वाहनों पर टेंट, छोलदारी लादने का सिलसिला सुबह से देर रात तक चलता रहा। दिगंबर अनी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा के बाहर लगे सैकड़ों टेंट समेट लिए गए। प्रयाग से नागाओं के काशी कूच का सिलसिला आरंभ हो गया। अब नागा संन्यासी काशी में गंगा तट पर महीने भर महाशिवरात्रि तक प्रवास करेंगे।
(सभी फोटो- अनिरुद्ध पांडे, अमर उजाला)
काशी प्रवास के लिए सभी 13 अखाड़ों के कई महामंडलेश्वरों, महंतों ने विदाई ले ली। पंचदशनाम जूना अखाड़े की संन्यासिनी सभा के माईबाड़े की संन्यासिनियों के कढ़ी-पकौड़ा की रस्म अलख दरबार में पूरी हो गई। इसी के साथ श्रीमहंत मीरापुरी, यशोदा गिरि समेत सौ से अधिक संन्यासिनियों ने भी रवानगी कर दी। जूना अखाड़े में मंगलवार को कढ़ी-पकौड़ा होगा। इसके बाद धर्म ध्वजा उतारी जाएगी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने दिव्य कुंभ की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जाताया। उन्होंने कहा कि अखाड़ों ने इस सबसे बड़े संत समागम के जरिए विश्व समुदाय को भारतीय संस्कृति से परिचित कराया है। उन्होंने कुंभ की दिव्यता की सराहना की।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि ने तीर्थराज प्रयाग, द्वादश माधव परिक्रमा शुरू होने और पहली बार अकबर के किले में अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने को हिंदू संस्कृति के उत्थान का द्योतक बताया।