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Demands raised for guaranteed procurement at MSP, loan waivers, and a minimum wage of ₹30,000; calls made to scrap the four labour codes.
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एमएसपी पर कानूनी खरीद, कर्जमाफी और 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग; चार लेबर कोड रद्द करने की उठी आवाज
जींद। महंगाई, बेरोजगारी, खेती के बढ़ते संकट और रोजगार की असुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसान, मजदूर, कर्मचारी, छात्र और नौजवान सोमवार को सड़कों पर उतर आए। किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों तथा खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों के राष्ट्रीय आह्वान पर आयोजित देशव्यापी जेल भरो सत्याग्रह के तहत सैंकड़ों लोग नेहरू पार्क में एकत्रित हुए। यहां जनसभा के बाद प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में लघु सचिवालय पहुंचे और अपनी गिरफ्तारियां दीं। प्रशासन की ओर से पहले से भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। आंदोलन के दौरान 670 लोगों ने गिरफ्तारी दी। प्रदर्शनकारियों में किसान, मजदूर, स्कीम वर्कर्स, कच्चे कर्मचारी, छात्र, नौजवान और आम नागरिक शामिल रहे। इस दौरान सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों के खिलाफ लोगों में बढ़ता रोष दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने किसान की उपज का उचित मूल्य, मजदूर को सम्मानजनक मजदूरी और युवाओं को रोजगार देने की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि महंगाई और बेरोजगारी का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है, जबकि किसान खेती के बढ़ते खर्च और फसल के उचित दाम नहीं मिलने से परेशान हैं।
नेताओं ने अमेरिका के साथ कृषि क्षेत्र में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करने और सभी फसलों की एमएसपी पर कानूनी खरीद की गारंटी देने की मांग की। इसके अलावा किसान और मजदूरों की कर्जमाफी, फसल बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक तथा वर्ष 2023, 2024 और 2025 में बाढ़ एवं सेम से प्रभावित फसलों का लंबित मुआवजा तुरंत जारी करने की मांग रखी गई। नहरी सिंचाई और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने तथा सेम की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने चारों लेबर कोड रद्द कर पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग की। परियोजना वर्करों, सफाई कर्मचारियों सहित सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करने की मांग रखी गई। मनरेगा को बहाल कर वीबी-जी राम जी योजना रद्द करने, मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की मांग भी प्रमुख रही। बिजली क्षेत्र के निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने तथा श्रम कल्याण बोर्ड को बहाल कर निर्माण मजदूरों को लंबित लाभ देने की मांग की गई।
नारेबाजी के बीच दी गिरफ्तारी, सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग नेहरू पार्क में संयुक्त अध्यक्षता रमेश चंद्र, रामप्यारी, प्रेम सिंहमार, सतपाल सरोहा, सुधीर, होशियार सिंह और सतीश बड़ौदा ने की, जबकि संचालन कपूर सिंह ने किया। रोजगार, किसानों की आय, महंगाई, श्रम अधिकार और सामाजिक सुरक्षा के सवाल लंबे समय से बने हुए हैं। सरकार को अपने चुनावी वादों और वर्तमान जमीनी स्थिति की तुलना करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने खाद्य सुरक्षा कानून प्रभावी करने, राशन व तेल में कटौती बंद करने, पेंशन पर आय सीमा समाप्त करने, बस्तियों में बुलडोजर कार्रवाई रोकने, आवास और लंबित प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्तें जारी करने तथा बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की मांग भी उठाई।
गिरफ्तारी से पहले प्रदर्शनकारियों ने किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद, साझी मांगें-साझा संघर्ष जिंदाबाद और जात-धर्म पर नहीं बंटेंगे के नारे लगाए। इस अवसर पर मास्टर चांद बहादुर, मास्टर बलबीर सिंह, जोगिंद्र नैन, राजबीर चौहान, महाबीर, धर्मबीर लोहान, कांग्रेस नेता ऋषिपाल सिहाग, संदीप जाजवान, राजबाला, ओमप्रकाश कंडेला, सुधीर शास्त्री, सीपीआईएम नेता कॉमरेड प्रकाश चंद्र शामिल हुए।
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