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The strike of the employees of the irrigation department in Karnal continues for the seventh day, demanding release of salary and compensation
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करनाल में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों का सातवें दिन भी धरना जारी, वेतन और मुआवजा जारी करने की मांग
करनाल में माल रोड पर स्थित सिंचाई विभाग के सर्किल कार्यालय के बाहर हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्कर यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी रहा। कर्मचारी पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने और कुरुक्षेत्र में 11 साल पहले हुए एक हादसे के मुआवजे की राशि न दिए जाने से नाराज हैं। यूनियन ने प्रशासन को 14 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है, और तब तक धरना जारी रखने का ऐलान किया है।
सर्व कर्मचारी संघ के जिला सचिव सेवाराम बड़सर ने बताया कि कर्मचारियों ने कैबिनेट मंत्री श्रुति चौधरी से मुलाकात की थी, जिन्होंने अधिकारियों को चार से पांच दिनों में वेतन जारी करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, पूर्व राज्य प्रधान कृष्ण शर्मा ने कहा कि मंत्री के आदेश के बावजूद विभाग के अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
जिले में करीब 450 कर्मचारियों और अधिकारियों का दो महीने का वेतन बकाया है।" उन्होंने बताया कि रविवार को विधायक जगमोहन आनंद के 'चाय पर चर्चा' कार्यक्रम में कर्मचारी अपनी मांगें उनके सामने रखेंगे।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने बताया कि यह मामला कुरुक्षेत्र में 11 साल पहले हुए एक हादसे से जुड़ा है, जिसमें करनाल के एक कर्मचारी की नहर में गिरने से मौत हो गई थी। कोर्ट ने सिंचाई विभाग को मृतक के परिवार को 40 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था, जो अब ब्याज सहित बढ़कर 77.5 लाख रुपये हो गया है। विभाग ने अभी तक यह राशि जारी नहीं की है, जिसके कारण कर्मचारियों के वेतन पर भी रोक लगी हुई है।
कृष्ण शर्मा ने चेतावनी दी कि जब तक मुआवजा और कर्मचारियों का बकाया वेतन जारी नहीं किया जाता, हमारा धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।" यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ 'जल बचाओ' का नारा देती है, लेकिन दूसरी तरफ सिंचाई विभाग से 700 पदों को समाप्त कर कर्मचारियों को बेरोजगार कर रही है।
प्रदर्शन में जिला कैशियर ओमप्रकाश म ATA, ब्रांच प्रधान सुरेश शर्मा, कैशियर रमेश पाल, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सुशील गुर्जर, जिला सचिव सेवाराम बड़सर, अनुज राणा और संजय कुमार सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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