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Saraswati will no longer cause floods in Kurukshetra, dams will also be strengthened; work of the first phase begins from Pipli
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कुरुक्षेत्र में अब बाढ़ का कारण नहीं बनेगी सरस्वती, बांध भी होंगे मजबूत; पहले चरण का पिपली से कार्य शुरू
अब बारिश के सीजन में भी सरस्वती नदी बाढ़ का कारण नहीं बनेगी। बांध कटाव नहीं हो पाएगा तो महाभारत क़ालीन बलराम जी की सरस्वती यात्रा भी जीवंत होगी। इसके लिए सरस्वती के दोनों ओर पटरी बनाई जाएगी, जिसके पहले चरण का कार्य शुक्रवार को पिपली के इस्सरगढ़ से शुरू कर दिया गया है।
यहां से यमुनानगर जिला के उंचा चंदाना तक यह कार्य जून माह के अंत तक पूरा किया जाएगा, जिस पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके बाद दूसरे चरण में उंचा चंदाना से आदीब्रदी तक व पिपली से पिहोवा होते हुए कैथल के गांव पोलड़ तक यह करीब 200 किलोमीटर का प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा।
प्रोजेक्ट की शुरूआत के दौरान सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धूमन सिंह किरमच ने बताया कि इसके माध्यम से कुरु भूमि कुरुक्षेत्र में सरस्वती नदी के ऊपर जब महाभारत का युद्ध हुआ तब बलराम जी भगवान कृष्ण जी के बड़े भाई ने युद्ध में हिस्सा ना लेकर सरस्वती की यात्रा द्वारका से लेकर आदिबद्री तक की थी जिसका वर्णन महाभारत के वनप्रव , शेल्य प्रव व वामन पुराण व कई इन ग्रंथों में आता है उन्होंने इस यात्रा के दौरान सभी तीर्थों के दर्शन किए थे सरस्वती बोर्ड इस यात्रा को उन्हें प्रारंभ करने हेतु रास्ता बना रहा है तथा सरस्वती को मज़बूत करने के लिए दोनों तरफ़ मज़बूत रास्ता बनाने व पगडंडी बनाने के लिए यह काम शुभारंभ किया है
डॉर्क जोन भी होगा दूर
धुम्मन सिंह के मुताबिक सरस्वती नदी के दोनों तरफ़ के बांध मज़बूत करने से इस क्षेत्र में फ्लड से भी छुटकारा मिलेगा तथा डार्क ज़ोन भी दूर होगा। पहले चरण का कार्य क़रीब 63 किलोमीटर क्षेत्र में होगा। सरस्वती नदी बरसात के दिनों में बहूत सारा पानी लेकर आती है जो ज़्यादा बरसात या फलड होने से सरस्वती नदी टूट जाती थी लेकिन मुख्यमंत्री नायब सैनी जी की इस योजना से सरस्वती नदी में कोई कटाव नहीं होगा इस योजना के माध्यम से सरस्वती बोर्ड सरस्वती पर दोनों तरफ़ रास्ता बना रहा है और एक पगडंडी बनाकर लोगों को आने जाने के लिए भी सुविधाएं दी जाएंगी यह कार्य जल्द से जल्द पूरा करने का टारगेट लिया गया है जिसके माध्यम से सरस्वती बोर्ड में जीतने रिजर्वायर नदी के किनारे बनाए हुए हैं उसमें पानी डालने का भी काम ज़्यादा होगा और और रादौर वह लाडवा क्षेत्र का डार्क ज़ोन भी दूर होगा होगा। किसानों को फ़्लॉड से राहत मिलेगी खेती के लिए ज़्यादा पानी मिलेगा ,पवित्र यात्राओं का मार्ग बनेगा।
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