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My Village, My Pride: Villagers pour out their anguish at the Manethi Chaupal; canal water becomes a forced necessity, questions raised about its quality.
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मेरा गांव मेरी शान: मनेठी चौपाल में छलका ग्रामीणों का दर्द, नहरी पानी बनी मजबूरी, उठाए गुणवत्ता पर सवाल
गांव मनेठी में दशकों पुरानी पानी की समस्या आज भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। गांव का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और अब करीब 400 फीट तक पहुंच चुका है। ऐसे में अधिकांश ग्रामीण नहरी पानी पर निर्भर हैं, लेकिन यह पानी भी उनकी जरूरतों और स्वास्थ्य के लिहाज से संतोषजनक नहीं है। ये बातें ग्रामीणों ने शनिवार को गांव मनेठी में अमर उजाला की तरफ से आयोजित चौपाल में कहीं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव तक पहुंचने वाला नहरी पानी खालेटा और बासदूदा क्षेत्र से होकर आता है। लंबी दूरी तय करने के कारण यह पानी पीने योग्य गुणवत्ता का नहीं रह जाता। वे इस पानी को आरओ से शुद्ध करने के बाद उपयोग करते हैं, लेकिन इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाता। नहरी 40 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार की जोड़ों की समस्या से जूझ रही है।
पेयजल संकट के साथ-साथ पशुपालकों की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं। मनेठी में लगभग 60 प्रतिशत परिवार पशुपालन से जुड़े हुए हैं और उनकी आजीविका का प्रमुख आधार पशुधन है। गांव में स्थित जोहड़ पिछले करीब 20 वर्षों से सूखा पड़ा हुआ है। इसके अलावा अन्य तालाब में भी पानी नहीं होने के कारण पशुओं को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। मजबूरी में पशुपालक पशुओं को नहरी पानी पिलाने के लिए विवश हैं।
पशुपालकों का कहना है कि नहरी पानी के कारण पशुओं में विभिन्न प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। कई पशुपालकों ने बताया कि पानी की कमी के कारण पशुओं की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है।
पानी का करवाया जाएगा टेस्ट
सिंचाई विभाग के एक्सईएन दीपक ने ग्रामीणों की समस्या को लेकर कहा कि बोरवेल या अंडरग्राउंड वाटर में कोई दिक्कत होगी, नहीं तो जो पानी नहर में सप्लाई किया जाता है वह हर जगह पर एक जैसा पानी ही होता है। जहां तक सवाल पानी से होने वाली समस्या का है तो इसके लिए टेस्ट करवाया जाएगा, तभी मूल कारण पता लग पाएगा।
पशुओं के लिए अलग से जल स्रोत हो तैयार
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि गांव के खाली पड़े जोहड़ और तालाब में नियमित रूप से पानी डलवाया जाए। यदि जोहड़ों और तालाबों में पानी उपलब्ध हो जाए तो पशुओं के लिए अलग से जल स्रोत तैयार हो सकेगा और पेयजल संकट की गंभीरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
गांव में पानी की समस्या कई दशकों से बनी हुई है। भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और नहरी पानी की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। इसे लेकर पूर्व सीएम और मौजूदा सीएम से गुहार लगा चुके हैं, मगर फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। हमारी गांव की ये सबसे बड़ी समस्या है। देश राज, सरपंच
हमारे जोहड़ पिछले करीब 20 साल से सूखे पड़े हैं। पशुओं के लिए पानी की भारी किल्लत है। जोहड़ों में पानी डलवाया जाए तो बड़ी राहत मिलेगी। अमित यादव
घर में इस्तेमाल होने वाले पानी को आरओ से फिल्टर करना पड़ता है। इसके बावजूद पानी का स्वाद और गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था जरूरी है। सहीराम यादव
गांव के लोग घुटनों, पैरों और हाथों के दर्द से परेशान हैं। हमें शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम हों। मैं खुद दर्द से पीड़ित हूं। जयप्रकाश यादव
करीब 60 प्रतिशत लोग पैर, हाथों से दर्द से पीड़ित हैं। पानी की मांग को लेकर हम कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। नरबीर यादव
पानी की मांग को लेकर हम कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। राकेश कुमार
नहरी पानी पीने से पशुओं में बीमारियां बढ़ रही हैं। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। सज्जन कुमार
महिलाओं को पानी की व्यवस्था के लिए रोजाना परेशान होना पड़ता है। गांव में स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। सोमदत्त
खाली पड़े जोहड़ों और तालाबों में पानी भरवाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इससे गांव और पशुपालकों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। शेर सिंह
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