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Video: बिलासपुर में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर सख्ती, होटल-ढाबों की होगी औचक जांच
बिलासपुर जिले में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन अब सख्त कार्रवाई करेगा। होटल, रेस्तरां, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के साथ औचक जांच भी तेज की जाएगी। विशेष रूप से बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले खाद्य तेल की जांच पर फोकस रहेगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्देश उपायुक्त राहुल कुमार ने वीरवार को बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में दिए।
उपायुक्त ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और जिले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग को दूध, पनीर, मिठाइयों, खाद्य तेल, मसालों, फिश फ्राई, पकोड़ों, समोसों सहित सभी तले हुए खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में एक ही खाद्य तेल का तीन बार से अधिक उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसा तेल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है और कैंसर, हृदय रोग सहित अन्य बीमारियों की आशंका बढ़ा देता है।
बैठक में विभाग ने बताया कि 30 जून 2026 तक जिले में 7,439 खाद्य व्यवसाय संचालकों का पंजीकरण और 419 लाइसेंस सक्रिय हैं। पिछले आठ महीनों में 75 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 58 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें से छह नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इसी अवधि में 21 मामलों का निपटारा कर 6.86 लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले आठ महीनों में फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन कार्यक्रम के तहत 252 खाद्य व्यवसाय संचालकों, मिड-डे मील और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। जिले में अब तक 2,829 लोगों को खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों, स्वयं सहायता समूहों और व्यापारिक संगठनों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंच सकें।
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