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Kullu: जहां बंदिशें थीं, वहीं से शुरू हुआ बदलाव; हरा दासी ने बदली महिलाओं की तकदीर
Ankesh Dogra
Updated Mon, 16 Mar 2026 03:58 PM IST
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बंजार उपमंडल के दुर्गम पनहिर गांव की रहने वाली हरा दासी आज समाज में बदलाव की मिसाल बनकर उभरी हैं। संयुक्त परिवार का हिस्सा होने के कारण घर के तमाम कामकाज की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सामाजिक बंदिशों के बावजूद उन्होंने महिला मंडल का गठन कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की और उनके परंपरागत उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का रास्ता बनाया। इससे कई महिलाओं के जीवन में आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास की नई किरण जगी है। हरा दासी ने क्षेत्र के दिव्यांग लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई और गांव में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। इसके अलावा उन्होंने अपनी पंचायत के किसानों, बागवानों और आम लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए करीब एक करोड़ रुपये तक का लाभ दिलाने में मदद की। अपने जज़्बे और सेवा भाव से हरा दासी आज पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गई। उन्होंने महिला मंडल के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं के सशक्तिकरण की नींव रखी। हरा दासी ने महिलाओं के बनाए हुए परंपरागत उत्पादों को बाजार दिलाने की पहल की। आज उनके समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पाद दिल्ली, मुंबई और शिमला तक सप्लाई किए जा रहे हैं। इन उत्पादों में खासकर राजमा, शहद और देसी घी शामिल हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। इसके अलावा कोदरे के आटे से बनने वाली वस्तुओं को भी बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे दिव्यांग लोगों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया गया, जिन्हें अब तक इन योजनाओं की जानकारी नहीं थी। हाल ही में हरा दासी ने 10 जरूरतमंद लोगों को व्हीलचेयर, बैसाखी और टॉयलेट सीट उपलब्ध करवाने में मदद की है। हरा दासी अब प्रदेश सरकार की वृक्षारोपण योजना से भी जुड़ गई हैं। इसके तहत क्षेत्र के पनिहार में 2.5 हेक्टेयर भूमि पर महिलाओं के सहयोग से 1600 पौधे रोपे जा चुके हैं। इस अभियान में महिला मंडल जय शेष दुर्गा और पनिहार की महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। हरा दासी ने अपने क्षेत्र में एक सिलाई सेंटर भी शुरू किया है, जहां अब तक 200 युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 17 महिलाओं को स्थायी रोजगार भी मिल चुका है। हरा दासी ने बताया कि वह ऐसे ग्रामीण क्षेत्र से आती हैं, जहां महिला मंडल का गठन करना भी समाज के खिलाफ जाने जैसा माना जाता था। लेकिन कुछ करने का जज्बा था। उन्होंने देवता से अनुमति लेकर महिला मंडल का गठन किया। शुरुआत में उन्हें समाज का विरोध भी झेलना पड़ा, लेकिन जैसे-जैसे उनके काम के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे, लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। आज बंजार ब्लॉक की करीब 2000 महिलाएं उनके साथ जुड़कर काम कर रही हैं।
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