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Mandi: रोजाना पांच घरों में जा रहे हैं देव कमरूनाग, अब तक 120 मेहमाननवाजियों का दे चुके हैं मौका
Ankesh Dogra
Updated Mon, 02 Mar 2026 09:50 AM IST
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मंडी जनपद के अराध्य देव कमरूनाग शिवरात्रि महोत्सव के बाद अपने भक्तों के घरों पर जाकर उन्हें मेहमाननवाजी का मौका दे रहे हैं। भक्तों के पास वर्ष में सिर्फ यही एक अवसर होता है जब वे अपने अराध्य देव को अपने घर पर आमंत्रित कर पाते हैं। देव कमरूनाग, जिनका नाम और वाद्य यंत्रों की धुन सुनते ही मंडी जनपद के लोग भाव विभोर हो उठते हैं। देव कमरूनाग का मूल स्थान कमरूनाग झील के तट पर है जबकि उनका भंडार कमरूघाटी के गोत गांव में है। देव कमरूनाग का सूरजपाखा (छड़ी) वर्ष में सिर्फ एक बार शिवरात्रि महोत्सव में शामिल होने के लिए मंडी आता है। शिवरात्रि में शामिल होने से पहले और उसके बाद देव कमरूनाग अपने भक्तों के घरों पर जाकर उन्हें मेहमाननवाजी का मौका देते हैं। देव कमरूनाग के साथ चल रहे उनके पूर्व गुर नीलमणी ने बताया कि 6 फरवरी को देव कमरूनाग अपने भंडार से मंडी के लिए रवाना हुए थे। अभी तक 120 से अधिक घरों पर जाकर अपने भक्तों को आशीवार्द और मेहमाननवाजी का मौका दे चुके हैं, जबकि आने वाले दिनों में इतनी की संख्या में भक्तों ने निमंत्रण दे रखे हैं। रोजाना देव कमरूनाग अधिकतम 5 घरों पर जाते हैं। भक्तों में देव कमरूनाग के उनके घर पर आगमन को लेकर खासा उत्साह रहता है। देवभूमि ग्रुप के मालिक राजेंद्र वशिष्टा और उनकी पत्नी मोनिका वशिष्टा ने बताया कि जब से उन्होंने मंडी में अपने कारोबार की शुरूआत की है तभी से ही देव कमरूनाग को आमंत्रित करते हैं। वर्ष में सिर्फ यही एक अवसर होता है जब उन्हें देव कमरूनाग की मेहमाननवाजी का सौभाग्य मिलता है और बीते 12 वर्षों से उन्हें यह सौभाग्य लगातार प्राप्त हो रहा है। बता दें कि आने वाली संक्रांति यानी 14 मार्च तक देव कमरूनाग की यह यात्रा पूर्ण हो जाएगी और वे वापिस अपने भंडार में प्रवेश करेंगे। खास बात यह भी है कि देव कमरूनाग की यह यात्रा पूरी तरह से पैदल ही रहती है, वे कभी किसी वाहन पर सवार होकर नहीं जाते।
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