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Sirmour: सिरमौर के दुर्गम क्षेत्र से निकलकर एनडीए परीक्षा में चमका एसवीएन स्कूल का अनुराग
Ankesh Dogra
Updated Fri, 08 May 2026 04:14 PM IST
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सिरमौर जिले के प्रतिष्ठित शिशु विद्या निकेतन स्कूल नाहन ने एक बार फिर शिक्षा और सफलता के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है। स्कूल के प्रतिभावान छात्र अनुराग (निवासी दुर्गम क्षेत्र कोडगा) ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। शुक्रवार को अनुराग नाहन स्थित अपने स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानाचार्य कुंदन ठाकुर और शिक्षकों से मिलकर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधन ने होनहार छात्र का शानदार स्वागत किया। इस दौरान प्रधानाचार्य ने कहा कि दुर्गम क्षेत्र कोड़गा से ताल्लुक रखने वाले अनुराग ने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में स्थान पाया जा सकता है। एनडीए में चयन के बाद अब अनुराग भारतीय सेना में ऑफिसर (लेफ्टिनेंट) बनकर देश की सेवा करेंगे। उन्होंने कहा कि अनुराग शुरूआत से ही मेहनती छात्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस ऊंचाई तक पहुंचने के पीछे 90 प्रतिशत मेहनत छात्र की अपनी है। स्कूल के शिक्षकों ने हमेशा छात्र का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि एनडीए में एसएसबी बहुत मुश्किल रहता है। लेकिन छात्र ने सभी चुनौतियों को पास करते हुए सफलता प्राप्त की है। उन्होंने छात्र व उसके परिवार को बधाई दी है। उसकी सफलता न केवल नाहन के लिए, बल्कि पूरे हिमाचल के लिए प्रेरणादायक है। हमें विश्वास है कि वह सेना में जाकर देश का नाम और अधिक रोशन करेगा। वहीं, अनुराग ने कहा कि जब वह आठवीं कक्षा में थे तो उनके भाई (मौसी के बेटे) का चयन भारतीय सेना में हुआ। उसके भाई ने बताया कि उनके बड़े अधिकारी भी होते हैं और उनका चयन सीधे होता है। इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह भी भारतीय सेना में बड़े अधिकारी बनेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा गांव से ही हुई, इसके बाद नाहन में आए और यहां एसवीएन स्कूल में शिक्षकों का मार्गदर्शन व लाइब्रेरी का साथ मिला। इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी तैयारी की। उन्होंने कहा कि पहले तीन प्रयासों के दौरान तो वह लिखित परीक्षा में ही असफल हो गए। लेकिन हार नहीं मानी। एनडीए के लिए आगे की पढ़ाई भी छोड़ दी और पूरा समय तैयारी को दिया। इस बार उनका अंतिम प्रयास था और उन्होंने इसके लिए पूरी जान लगाई। उन्होंने कहा कि उनका घर ग्रामीण क्षेत्र में है। सड़क सुविधा न के बराबर है। ऐसे में उन्होंने बहुत कठिन जीवन देखा है। अनुराग इस दौरान स्कूल के अन्य छात्रों से भी मिले और उन्होंने इस परीक्षा को लेकर अपने अनुभव उनके साथ सांझा किए। उन्होंने छात्रों से कहा कि ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं होता।
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