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Video: रिकॉर्ड बना, पौधे नहीं बचे, वृक्षारोपण अभियानों की जमीनी हकीकत पर सवाल
विश्व पर्यावरण दिवस और विशेष वृक्षारोपण अभियानों के तहत बड़े पैमाने पर पौधे लगाने के दावों के बीच उनकी देखरेख को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय परिसर में 9 जुलाई 2025 को आयोजित एक विशाल पौधारोपण कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं, छात्रों, अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत लगभग दो लाख पौधे लगाए गए थे। इस उपलब्धि के लिए संस्थान का नाम Guinness World Records में भी दर्ज हुआ।
हालांकि, एक वर्ष बाद स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगाए गए पौधों में से अब केवल गिने-चुने पौधे ही जीवित बचे हैं, जबकि अधिकांश पौधे देखरेख के अभाव में सूख गए या नष्ट हो गए। आरोप है कि रिकॉर्ड बनाने के बाद पौधों के संरक्षण और नियमित सिंचाई की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। उनका कहना है कि लखनऊ में कई स्थानों पर हर वर्ष हजारों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन रखरखाव की कमी के कारण उनका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में वृक्षारोपण अभियानों की सफलता का वास्तविक पैमाना पौधों के जीवित रहने और विकसित होने की दर होनी चाहिए, न कि केवल रोपित पौधों की संख्या।
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