बुरहानपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नगर निगम परिषद की बैठक 20 मई को आयोजित होना तय थी, लेकिन बैठक से पहले पार्षदों को न तो कोई लिखित सूचना दी गई और न ही फोन पर जानकारी दी गई। देर रात करीब 11 बजे व्हाट्सएप पर केवल इतना संदेश भेजा गया कि “किन्हीं अपरिहार्य कारणों” से बैठक निरस्त की जा रही है।
सुबह जब पार्षद और पार्षद प्रतिनिधि नगर निगम के गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। इसके बाद पार्षदों में भारी आक्रोश देखने को मिला और उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। नगर निगम परिषद की इस बैठक में शहर के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। पार्षदों का कहना है कि उन्होंने जल संकट, स्वच्छता और विकास कार्यों जैसे विषयों पर पूरी तैयारी कर रखी थी, लेकिन बिना ठोस कारण बताए बैठक निरस्त कर दी गई।
पार्षदों ने निगम प्रशासन की कार्यशैली को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि देर रात सिर्फ व्हाट्सएप पर सूचना भेजना जनप्रतिनिधियों का अपमान है। उपनेता प्रतिपक्ष फहीम हाशमी ने आरोप लगाया कि महापौर कांग्रेस पार्षदों की अनदेखी कर रही हैं। उनका कहना है कि परिषद में जल संकट और स्वच्छता जैसे गंभीर मुद्दों पर सत्ता पक्ष का घेराव होना था, इसलिए बैठक से बचने के लिए इसे निरस्त किया गया।
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वहीं नेता प्रतिपक्ष अकील औलिया ने महापौर पर “हिटलरशाही” का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मन होता है बैठक बुला ली जाती है और जब मन होता है निरस्त कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत कलेक्टर और पार्टी नेतृत्व तक की जाएगी।
पार्षद प्रतिनिधि डायमंड ने भी निगम प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुरानी नल-जल योजना को दोबारा शुरू करने के लिए 90 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है, जबकि पहले ही करोड़ों रुपये की जल आवर्धन योजना लागू की जा चुकी है।
वहीं, इस पूरे मामले में जब नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि शहर में गहराए जल संकट के कारण निगम का पूरा अमला पानी की व्यवस्था में जुटा हुआ है। उन्होंने बताया कि बैतूल के पारसडोह डैम से पानी लाने की व्यवस्था की जा रही है और इसी वजह से परिषद की बैठक निरस्त की गई।
हालांकि सवाल अब भी कायम हैं कि यदि बैठक निरस्त करनी ही थी तो पार्षदों को समय रहते आधिकारिक सूचना क्यों नहीं दी गई। फिलहाल नगर निगम की इस लापरवाही ने प्रशासनिक कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।