मध्यप्रदेश में लगभग 20 साल से अधिक समय से काबिज भाजपा सरकार प्रदेश को स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने के चाहे लाख दावे करे, लेकिन मैदानी हकीकत कुछ और ही नज़र आती है। ग्रामीण क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं तो एक तरफ, यहां ग्रामीणों के पास मृतकों का अंतिम संस्कार करने के लिए भी मुक्तिधाम नही है। ऐसा ही एक मामला गुना जिले से सामने आया है, जहां के एक गांव के ग्रामीण मृतकों का अंतिम संस्कार पास के गांव बांसखेड़ी में करने को मजबूर हैं जो राजस्थान की सीमा में लगता है। बारिश में गांव के लोग पानी से भरे नाले को पार करके शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाते हैं।
दरअसल, यह मामला गुना जिले की बमोरी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले भोटूपुरा गांव का है, जहां बुधवार को एक वृद्ध व्यक्ति का निधन हो गया था। इसके बाद निकाली गई उसकी शव यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमे ग्रामीण मृतक की अर्थी को कंधा दिए हुए आगे बढ़ रहे हैं और इसी बीच एक नाला दिखाई पड़ता है। जिसमें भरे हुए पानी से होकर ग्रामीण शव के साथ निकलते हैं और राजस्थान में लगने वाले बांसखेडी गांव में प्रवेश कराते हैं। इसके बाद अंतिम संस्कार करने की प्रक्रिया शुरू करते हैं।
गांव के एक ग्रामीण हरविलास प्रजापति ने बताया कि हमारे गांव में शमसान घाट नहीं है। किसी की मौत होने पर उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए राजस्थान ले जाना पढ़ता है। मेरी उम्र लगभग 40 साल की हो गई है और तभी से में ये सब देख रहा हूं। बारिश के समय में नाले में पानी भरा होता है तो हमें उसी से होकर गुजरना पड़ता है। अधिकारियों से हम मुक्तिधाम के बारे पूछते हैं तो वे कहते हैं कि बन रहा है। यहां न तो मुक्तिधाम है और न ही हमारी शिकायत की सुनवाई हो रही है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में अंतिम संस्कार से जुड़ी अलग अलग तस्वीरें ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार सामने आती रही है, जिसमें कई ग्रामीण कीचड़ से सने हुए रास्ते, नदी और नाला पार करने के बाद शव अंतिम संस्कार करते हैं। लेकिन, संभवतः यह ऐसा पहला मामला है जहां गांव में मुक्तिधाम न होने के चलते राजस्थान की सीमा में लगने वाले बांसखेड़ी गांव में एमपी के गुना जिले के मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है।