मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के पंधाना ब्लॉक अंतर्गत कुमठी क्षेत्र के करीब 10 से अधिक गांवों के किसान जल संसाधन विभाग के कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए। किसानों की मांग है कि अरबी की फसल के लिए नहरों से पानी उपलब्ध कराया जाए। किसानों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने नहरों का पानी बंद कर दिया है, जिससे खेतों में खड़ी फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन साल में पांच बार फसलों को पानी देने का दावा करता है, लेकिन इस बार उन्हें अब तक केवल चार बार ही पानी मिला है। पांचवीं फसल के लिए नहर बंद कर दी गई है, जिससे उन्हें भारी नुकसान की आशंका है।
वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि किसानों को लगभग छह महीने पहले ही सूचित कर दिया गया था कि इस वर्ष पानी की कमी रहेगी और केवल पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा, इसलिए किसानों को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद किसान अब प्रशासन पर दबाव बनाकर पानी की मांग कर रहे हैं।
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जब किसान जल संसाधन विभाग के कार्यालय पहुंचे तो वहां अधिकारी मौजूद नहीं मिले। इससे नाराज किसानों ने कार्यालय के गेट पर ही धरना शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की। उन्होंने सुक्ता और भगवंतसागर डैम से निकलने वाली नहरों को जल्द चालू करने की मांग की, ताकि खेतों तक पानी पहुंच सके।
किसानों के अनुसार, खंडवा जिले में अरबी की फसल का उत्पादन अप्रैल, मई और जून के बीच होता है। अप्रैल और मई में सिंचाई के लिए पानी की विशेष आवश्यकता होती है, जबकि जून में बारिश से काम चल जाता है। यदि समय पर पानी नहीं मिला, तो हजारों किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों ने बताया कि अरबी की फसल उगाने में प्रति एकड़ 60 से 70 हजार रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में फसल खराब होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब मध्य प्रदेश का किसान नाराज होता है, तो सत्ता तक बदल देता है।