विंध्य अंचल की आध्यात्मिक धरा को शताब्दियों तक आलोकित करने वाले महान संत (102) परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज अब पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही पूरे विंध्य क्षेत्र में शोक और श्रद्धा का वातावरण बन गया है। सतना जिले के पवित्र धारकुंडी आश्रम में उनकी पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी गई है, जहां हजारों श्रद्धालु उन्हें नमन करने पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार दोपहर 3:40 बजे धारकुंडी आश्रम पहुंचकर परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन करेंगे। वहीं डिप्टी मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पहले ही आश्रम पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके हैं।
वैराग्य, तप और मानव सेवा का जीवंत प्रतीक थे महाराज
परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और मानव कल्याण की अनुपम मिसाल रहा। उन्होंने मात्र 22 वर्ष की आयु में वैराग्य धारण कर सांसारिक मोह से स्वयं को मुक्त कर लिया था। इसके बाद उनका संपूर्ण जीवन समाज को आध्यात्मिक दिशा देने और मानवता के उत्थान में समर्पित रहा। उनके प्रवचन केवल धार्मिक उपदेश नहीं थे, बल्कि जीवन को सरल, संयमित और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते थे। ‘मानस बोध’ और ‘गीता बोध’ जैसे ग्रंथों के माध्यम से उन्होंने आम जन तक गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान को सहज भाषा में पहुंचाया। आश्रम द्वारा प्रकाशित उनकी शिक्षाओं पर आधारित पुस्तकों ने असंख्य साधकों के जीवन को दिशा दी।
जीवन में ही तय कर ली थी समाधि की जगह
परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज की दूरदर्शिता का प्रमाण यह भी है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में ही अपनी समाधि स्थल का चयन कर लिया था। सोमवार को उनकी पार्थिव देह को धारकुंडी आश्रम के गर्भगृह में विधि-विधान के साथ समाधि दी जाएगी।इस अवसर पर उनके गुरु भाई, चुनार स्थित सक्तेशगढ़ आश्रम के संत स्वामी अडगड़ानंद महाराज भी धारकुंडी पहुंच चुके हैं। उनके साथ श्री श्री 1008 रामायण महाराज, वीरेन्द्र कुमार महाराज और विजय महाराज सहित कई संतों की उपस्थिति से आश्रम का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 500 जवान तैनात
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और वीआईपी आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। धारकुंडी आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्र में करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसमें जिला पुलिस बल, जबलपुर की छठी बटालियन, रीवा पीटीएस तथा सागर और जबलपुर से आए विशेष बल शामिल हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रीवा और सतना मार्ग से आने वाले वाहनों की पार्किंग आश्रम से लगभग 5 किलोमीटर पहले धारकुंडी अस्पताल के पास बनाई गई है। पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह स्वयं मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर चुके हैं। प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक, अनुयायियों की आंखें नम
परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज के ब्रह्मलीन होने पर सांसद गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, नगर निगम परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंह तोमर, संजय पटारिया सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अनुयायियों का कहना है कि महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना थे, जिनका मार्गदर्शन पीढ़ियों तक प्रेरणा देता रहेगा।
धारकुंडी: जहां प्रकृति और अध्यात्म का होता है संगम
धारकुंडी आश्रम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति और अध्यात्म के अद्भुत संगम का प्रतीक है। ‘धार’ यानी जलधारा और ‘कुंडी’ यानी जलराशि से बना यह नाम अपने आप में इस क्षेत्र की पवित्रता को दर्शाता है। घने जंगलों के बीच बहती प्राकृतिक जलधारा यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को और भी प्रबल बनाती है। मान्यता है कि यह क्षेत्र पांडवों के वनवास काल से जुड़ा रहा है और हजारों वर्षों से अघमर्षण तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। आज भी रांची-जप्तम के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें श्रद्धालु अघमर्षण कुंड में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। चित्रकूट की चौरासी कोस परिक्रमा में भी धारकुंडी का विशेष स्थान है।