जिले की बल्देवगढ़ बाल विकास परियोजना के अंतर्गत सेक्टर देरी में पदस्थ संविदा पर्यवेक्षक प्रतिभा कुशवाहा पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से प्रतिमाह रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। शनिवार को इस मामले से जुड़े दो वीडियो सामने आए, जिनमें संविदा पर्यवेक्षक को कथित रूप से कर्मचारियों से रुपये लेते हुए देखा जा सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने तत्काल विभागीय जांच के निर्देश दिए।
कलेक्टर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान सेक्टर देरी में कार्यरत एक दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के बयान दर्ज किए गए। कई कर्मचारियों ने अपने बयानों में प्रतिमाह निर्धारित राशि वसूले जाने, पैसे नहीं देने पर प्रताड़ित करने तथा सेवा समाप्ति की धमकी देने के आरोप लगाए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मदीना खातून ने जांच दल को बताया कि सुपरवाइजर प्रतिभा कुशवाहा माह में दो से तीन बार बैठक आयोजित करती थीं और प्रत्येक कार्यकर्ता से हर माह 500 रुपये की मांग की जाती थी। रुपये नहीं देने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
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वहीं, आंगनबाड़ी सहायिका भागवती सेन ने बताया कि उनसे प्रतिमाह 300 रुपये लिए जाते थे। यदि किसी माह राशि नहीं दी जाती थी तो अगले माह दोनों महीनों की रकम एक साथ जमा करने का दबाव बनाया जाता था। पैसे नहीं देने पर नौकरी से हटाने की धमकी भी दी जाती थी।
इसी प्रकार रामकुंवर यादव सहित अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने भी अपने बयानों में प्रतिमाह रुपये मांगने और दबाव बनाने की बात कही। जांच प्रतिवेदन में रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने संविदा पर्यवेक्षक प्रतिभा कुशवाहा को शासकीय कार्यों से विरक्त करते हुए बल्देवगढ़ से पलेरा अटैच कर दिया है।
कलेक्टर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिभा कुशवाहा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए उन्हें सेवा से पृथक किए जाने के लिए आयुक्त, महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र भेजा गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति है।