धार्मिक नगरी उज्जैन एक ऐसी नगरी है, जहां वर्षों से चली आ रही कई परंपराओं का निर्वहन आज भी वैसे ही किया जाता है, जैसा कि इन परंपराओं की शुरूआत के समय किया जाता था। चैत्र मास की नवरात्रि की महाअष्टमी पर आज अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज के साथ ही समाजसेवी नारायण यादव, महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज, महामंडलेश्वर आनंदमयी और उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने नगर पूजा कर माता को मदिरा का भोग लगाया।
चैत्र माह की नवरात्रि के महाअष्टमी पर शनिवार को श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार आयोजित होने वाली नगर पूजा का निर्वहन चौबीस खंबा माता मंदिर में महामाया और महालाया माता को मदिरा का भोग लगाकर किया गया। यह पूजन विश्व शांति की कामना को लेकर हुआ, जहां माता को मदिरा का भोग लगाया गया और पूरे शहर में 27 किलोमीटर मदिरा की धार चढ़ाई चढ़ाने की शुरूआत हुई।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि चैत्र नवरात्रि में श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी द्वारा नगर पूजा का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में आज प्रात: 8 बजे चौबीस खंबा माता मंदिर से नगर पूजा प्रारंभ हुई। राजा विक्रमादित्य के समय से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन आज भी किया गया। जिसके तहत विश्व शांति और नगरवासियों की सुख समृद्धि के लिए 27 किलोमीटर मार्ग में मदिरा की धारा एक हांडी में लेकर कोटवार चलेऔर रास्ते में आने वाले प्रमुख देवी मंदिर और भैरव मंदिरों में नए ध्वज और चोला चढ़ाया गया।
पढ़ें: गर्मी के कारण बच्चों को स्कूल आने में परेशानी, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ ने इस मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
27 किमी तक बहेगी मदिरा की धार
यात्रा में आगे-आगे हांडी से मदिरा की धार पूरे नगर की परिक्रमा के दौरान सतत बहती रही। जोकि कालभैरव, भूखी माता, चामुंडा माता, गढ़कालिका सहित नगर के प्रमुख 40 मंदिरों तक पहुंचेगी। जहां पर भगवान का विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। साथ ही यात्रा में चल रहे कोटवार व अन्य सदस्यगण भजिए, पूड़ी, बड़बाकुल का भोग भगवान को अर्पित करने के साथ ही सोलह श्रृंगार की सामग्री व चुनरी माता को अर्पित करेंगे।
राजा विक्रमादित्य ने शुरू की थी पूजा
यात्रा के साथ पूजा का यह क्रम देर रात तक जारी रहेगा तथा रात्रि 8 बजे मां गढ़कालिका माता मंदिर होते हुए अंकपात मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर नगर पूजा का समापन होगा। ऐसी मान्यता है कि सम्राट राजा विक्रमादित्य ने अपने राज्य व नगर की खुशहाली व सुख समृद्धि के लिए महाअष्टमी पर नगर पूजा की शुरूआत की थी। जिसका निर्वहन आज तक अनवरत जारी है।
अधिकारी से लेकर ग्राम कोटवार रहे शामिल
जनकल्याण के लिए भारत के चक्रवर्ती सम्राट राजा विक्रमादित्य ने नगर पूजा की शुरूआत की थी। यह हमारी परंपरा है, जिसमें नगर पूजा के दौरान माता को मदिरा का भोग लगाया जाता था, जिसका निर्वहन आज भी किया जा रहा है। यह यात्रा इसलिए भी काफी अच्छी है, क्योंकि इसमें ग्राम के कोटवार से लेकर अधिकारी तक शामिल रहते है।
शाम तक 40 मंदिरों तक पहुंचेगी यह यात्रा
नगर पूजा की बात की जाए तो इस यात्रा की शुरूआत 24 खंबा माता मंदिर पर माता महामाया और माता महालाया के पूजन अर्चन और मदिरा का भोग लगाने के साथ हुई। यात्रा की शुरूआत के दौरान अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष माता का पूजन अर्चन कर उन्हें मदिरा का भोग लगाया। जबकि अधिकारी बड़ी संख्या में यहां मौजूद रहे। यात्रा की शुरूआत के बाद कोटवार आगे आगे शराब की हांडी लेकर चल रहे थे, जिसके पीछे नगर पूजा के दौरान चढ़ाए जाने वाली सामग्री लेकर शासकीय चलता नगर आया। आज नगर में यह पूजा हर्षोल्लास के साथ की जा रही है।