मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी केंद्र मौसम की मार से कब सुरक्षित होंगे? इन दिनों मौसम में हुए बदलाव की वजह से खरीदी केंद्रों में खुले आसमान ने नीचे रखी उपज आंधी-पानी के चलते असुरक्षित है। सरकार इस मामले को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है।
वहीं, मौसम विभाग की लगातार चेतावनियों के बाद भी विदिशा जिले के उपार्जन केंद्रों पर हजारों क्विंटल अनाज खुले आसमान के नीचे भीग रहा है। सिरोंज क्षेत्र से सामने आए वीडियो ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है। बारिश में भीगते गेहूं-चना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
सिरोंज के उपार्जन केंद्र पर किसान अपनी उपज तुलवाने पहुंच रहे हैं, मगर वहां न तो टीनशेड है और न ही तिरपाल की व्यवस्था। मौसम में बदलाव के चलते रोजाना रुक-रुक कर बारिश हो रही है। ऐसे में खुले में लगे गेहूं और चने के ढेर पानी से भीगकर खराब हो रहे हैं। वेयरहाउस की छत से गिर रहा पानी भी सीधे अनाज पर पड़ रहा है, जिससे सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
अपनी फसल तुलवाने आए किसान सुरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि तीन दिन से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। केंद्र पर न तो अनाज ढकने की व्यवस्था है और न ही कोई अधिकारी सुध लेने आ रहा है। हम खून-पसीने से फसल उगाते हैं, लेकिन सरकारी लापरवाही से वह बर्बाद हो रही है। इससे सरकार को लाखों का नुकसान होगा।
मौसम केंद्र बीते एक सप्ताह से लगातार बारिश और तेज हवा का अलर्ट जारी कर रहा है। इसके बाद भी विपणन विभाग और वेयरहाउस प्रबंधन ने अनाज को सुरक्षित रखने के इंतजाम नहीं किए। सिरोंज ही नहीं, जिले के कई केंद्रों पर यही हाल है। टीनशेड की कमी और तिरपाल न होने से खुले में पड़ा अनाज हर बारिश में भीग रहा है। गुणवत्ता खराब होने का खतरा है।
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सिरोंज उपार्जन केंद्र का वीडियो सामने आने के बाद किसानों में आक्रोश है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह बारिश का पानी गेहूं के ढेर में भर रहा है। वेयरहाउस के पाइप से गिर रहा पानी भी सीधे अनाज पर गिर रहा है। किसानों का आरोप है कि अधिकारी-कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं।
खरीद के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। नोडल अधिकारी केंद्रों का निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचे। तिरपाल, क्रेट और टीनशेड की व्यवस्था की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भीगा हुआ गेहूं जल्दी खराब होता है और उसमें फफूंद लग जाती है। ऐसे अनाज को न तो भंडारण में रखा जा सकता है और न ही पीडीएस में बांटा जा सकता है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो जिले में सरकार के लाखों रुपये का अनाज बर्बाद हो जाएगा ।