राजस्थान के कोटा जिले में स्थित नारी निकेतन एक अनोखी और प्रेरणादायक शादी का केंद्र बन गया। यहां निराश्रित और जन्म से दिव्यांग रीना का पूरे विधि-विधान के साथ विवाह हुआ। लंबे समय से नारी निकेतन में रह रही रीना की शादी झालावाड़ निवासी धर्मराज मीणा से संपन्न हुई, जिसने इस आयोजन को भावनात्मक और विशेष बना दिया।
बारात पहुंची तो उमड़ा उत्साह, निकेतन बना विवाह मंडप
दूल्हा धर्मराज मीणा जब नांता नारी शाला में बारात लेकर पहुंचे तो कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और शहरवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। पूरा नारी निकेतन विवाह पंडाल की तरह सजाया गया था। धर्मराज ने पारंपरिक रीति के अनुसार तोरण मारा, जिसके बाद पंडित ने परिग्रहण संस्कार संपन्न करवाया। रीना को विवाह मंडप में देख वहां मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
रीना की ‘कई मां’ बनीं नारी निकेतन की महिलाएं
नारी निकेतन की अधीक्षक अंशुल मेहंदीरता ने बताया कि जैसे किसी घर में मां अपनी बेटी का विवाह कराती है, उसी तरह यहां रीना की कई ‘माओं’ ने मिलकर उसकी शादी की सभी रस्में निभाईं। समाज के प्रतिष्ठित लोगों ने विवाह में उपहार भेंट किए। विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि यह आयोजन न केवल खास रहा, बल्कि यह संदेश भी देता है कि निराश्रित बच्चों को यहां पूरा प्यार, देखभाल और सम्मान मिलता है।
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चार दिनों से चल रहा था आयोजन, रीना का संघर्ष भरा सफर
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की डिप्टी डायरेक्टर सविता कृष्णिया ने बताया कि रीना के विवाह को लेकर बीते चार दिनों से कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे। 7 दिसंबर को विनायक स्थापना के साथ सभी रस्मों की शुरुआत हुई थी। 25 वर्षीय रीना नारी निकेतन में अक्तूबर से नहीं, बल्कि 12 वर्ष की आयु से रह रही है। वह उस समय लावारिस हालत में मिली थी। निकेतन में रहकर उसने सिलाई, बुनाई और कढ़ाई जैसे कौशल भी सीख लिए।