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Shimla: अचार की खटास बेचकर महिलाएं भरेंगी घर में मिठास, आचार, जूस और जैम के लघु उद्योग लगाने का बागवानी विभाग दे प्रशिक्षण
शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Feb 2026 05:16 PM IST
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महिलाएं अब बागवानी के क्षेत्र में भी स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रही हैं। इसमें बागवानी विभाग महिलाओं की मदद कर रहा है। विभाग महिलाओं को फलों के उत्पाद बनाना, भंडारण करना, बाजार में बेचने की तकनीक सिखा रहा है। महिलाएं इसके बाद घर में ही आचार, जूस और जैम के लघु उद्योग लगाकर अच्छी खासी कमाई कर सकती हैं। बागवानी विभाग ने बसंतपुर विकास खंड के ठैला गांव में फलों और फसलों की पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन (ग्रेडिंग, पैकिंग, भंडारण, परिवहन) और मूल्य संवर्धन तकनीक पर ऐसा ही प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। इसमें स्थानीय क्षेत्र की 48 महिला कृषकों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञ अमरजीत और कुलदीप वजीर ने महिलाओं को नींबू और गोभी का अचार, सेब का जैम, मिक्स फ्रूट जैम और बुरांस का स्क्वैश बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने महिलाओं को कच्चे माल के चयन और ग्रेडिंग, स्वच्छ धुलाई, काटने की उपयुक्त विधि, उबालने का नियंत्रित समय, संरक्षक के मानक उपयोग, जार और बोतलों की स्टेरलाइजेशन प्रक्रिया, सीलिंग, लेबलिंग और भंडारण तकनीकों की जानकारी दी। इस दौरान प्रतिभागियों ने स्वयं उत्पाद तैयार कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद संतुलन, शेल्फ लाइफ और संभावित बाजार मूल्य का व्यावहारिक आकलन भी किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को वैज्ञानिक फल प्रसंस्करण तकनीकों से जोड़ना, फलों की कटाई उपरांत होने वाले नुकसान को कम करना तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय में वृद्धि के अवसर उपलब्ध कराना था। विशेषज्ञों ने बताया कि फल प्रसंस्करण के माध्यम से कच्चे उत्पाद की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। फल प्रौद्योगिक विभाग की डॉ. माला शर्मा ने कहा कि प्रसंस्करण आधारित लघु उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम हैं। विभाग भविष्य में भी प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करता रहेगा। कार्यक्रम में डॉ. शरद गुप्ता, डॉ. राहुल चौधरी, देवेंद्र ठाकुर, खेम दास और प्रगतिशील किसान भोपाल वर्मा भी उपस्थित रहे। उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को विभागीय योजनाओं, अनुदान प्रावधानों व आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान की गई।
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