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Budaun News: अवैध खनन के खिलाफ भाकियू नेताओं ने खोला मोर्चा, कार्रवाई न होने पर दी धरने की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (असली) गैर राजनीतिक ने बदायूं जिले में बढ़ते अवैध खनन और खनन विभाग की कथित मिलीभगत के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को संगठन के पदाधिकारियों ने बैठक की। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि 19 जनवरी 2026 को जिला अधिकारी को ज्ञापन देकर अवैध खनन माफिया और खनन विभाग की शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जनपद में कुछ राजनेताओं की कथित सह पर जेसीबी मशीनों से खुलेआम अवैध मिट्टी खनन कराया जा रहा है, लेकिन खनन अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं। आरोप लगाया कि उझानी , इस्लामनगर , वजीरगंज , म्याऊं , कादरचौक में खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं, परंतु उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिला सचिव सूरजपाल सिंह ने एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि ग्राम नाई पिंडरी, बिल्सी निवासी दिलीप पुत्र अखिलेश की मशीन को खनन विभाग ने सीज कर मुजरिया थाने भिजवा दिया, जबकि वह कपिल ईंट उद्योग के लिए विधिवत रॉयल्टी जमा कर रेत उठाने की अनुमति लिए हुए था। यह भी आरोप लगाया गया कि कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी द्वारा रिपोर्ट आने पर मशीन छुड़वाने के नाम पर 35 हजार रुपये लिए गए। भाकियू पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि खनन कार्यालय में कुछ निजी लोग और कथित दलाल परमिशन दिलाने के नाम पर लेन-देन कर रहे हैं और कार्यालय को दलाली का अड्डा बना रखा है। जिला अध्यक्ष केपीएस राठौर ने कहा कि बरेली-आगरा हाईवे पर कंपनियां 8 से 9 फुट तक मिट्टी उठा रही हैं, जबकि अनुमति केवल दो मीटर तक की होती है। हाथ से मिट्टी उठाने की अनुमति 100 घन मीटर के लिए 10-12 दिन में दो से तीन ट्रैक्टरों को दी जाती है, लेकिन अनुमति मिलते ही 5 से 8 ट्रैक्टर लगाकर हजारों घन मीटर मिट्टी उठा ली जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना डाला और बिना ट्रिपाल के ओवरलोड मिट्टी ढोई जा रही है, जिससे सड़कों पर मिट्टी गिरती है और आम जनता का चलना मुश्किल हो जाता है। धूल के कारण किसानों की फसल प्रभावित हो रही है तथा स्कूली बच्चों का आवागमन भी बाधित हो रहा है। भाकियू नेताओं ने मांग की कि खनन अधिकारी कार्यालय में बैठे निजी लोगों व दलालों को तत्काल बाहर किया जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।
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