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कर्मचारियों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर भारतीय मजदूर संघ का प्रदर्शन, VIDEO
कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और मजदूरों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित 23 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपकर विभिन्न मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षा के कारण मजदूर, संविदा कर्मचारी और दिहाड़ी कामगार कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। संगठन ने आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए न्यूनतम वेतन 72 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग उठाई।
भारतीय मजदूर संघ ने आशा बहुओं का मानदेय 18 हजार रुपये, आशा संगिनी का 24 हजार रुपये करने तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की भी मांग की। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, परिवहन निगम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) तथा नगर निकायों में कार्यरत संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों को नियमित करने एवं उनके लिए स्पष्ट नियमावली बनाने की मांग की गई।
ज्ञापन में पटरी-रेहड़ी दुकानदारों, ई-रिक्शा और ऑटो चालकों के लिए स्थायी स्टैंड की व्यवस्था करने तथा उनके कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की भी मांग शामिल रही। संगठन ने एम्बुलेंस सेवा के बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली, ऊर्जा विभाग के पदाधिकारियों पर हुई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई समाप्त करने तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, नाई, धोबी, दर्जी, बढ़ई और पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा एवं बीमा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
इसके अलावा बैंकों में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल किया गया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि मजदूरों और कर्मचारियों की ज्वलंत एवं न्यायसंगत समस्याओं पर सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो संगठन आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगा।
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