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VIDEO: शहीद वीर अब्दुल हमीद के अपने ही शहर में नहीं लगी प्रतिमा
1965 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देकर चार पाकिस्तानी पैटन टैंक को ध्वस्त करने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद का नाम देश के वीर सपूतों में सम्मान से लिया जाता है। देश ने उन्हें सर्वोच्च सैन्य सम्मान देकर नायक बनाया, लेकिन उनके अपने जिले गाजीपुर के मुख्यालय पर आज तक उनकी प्रतिमा नहीं लग सकी। शहीद के बड़े पुत्र जैनुल हसन बताते हैं कि वह वर्षों से शासन और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जिला मुख्यालय पर पिता की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में शहीद की प्रतिमा स्थापित है, लेकिन जिस जिले ने उन्हें जन्म दिया, वहीं मुख्यालय पर उनकी एक भी प्रतिमा नहीं है। जैनुल हसन कहते हैं कि अगर शहर के विकास भवन चौराहे पर परमवीर अब्दुल हमीद की प्रतिमा लग जाए तो नई पीढ़ी को उनके साहस और बलिदान से प्रेरणा मिलेगी। उनका कहना है कि कई बार इस संबंध में अधिकारियों से बातचीत भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
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