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VIDEO: Gonda: साढ़े तीन साल बाद विधवा रामलली को मिला वरासत में हक
सरकारी दफ्तरों की चौखटों पर साढ़े तीन साल तक भटकने के बाद आखिरकार विधवा रामलली को वह अधिकार मिल ही गया, जिसकी वह हकदार थी। मां पाटेश्वरी शक्ति संवाद के मंच से उसे न सिर्फ सुना गया, बल्कि एक घंटे के भीतर न्याय भी मिला।
करनैलगंज के शाहजोत निवासी रामलली की जिंदगी 12 जुलाई 2022 को उस समय बदल गई, जब उसके पति शिवप्रसाद का निधन हो गया। पति की मृत्यु के बाद लेखपाल की ओर से कराई गई वरासत में बेटों के नाम तो दर्ज कर दिए गए, लेकिन पत्नी रामलली का नाम दस्तावेजों से गायब रहा। यह चूक उसके लिए अभिशाप बन गई। विधवा होने के बावजूद वह अपने ही हक से वंचित रह गई।
रामलली ने बताया कि उसने तहसील से लेकर अन्य अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उसे आश्वासन ही मिला। समय बीतता गया, दर्द गहराता गया और उम्मीदें टूटती चली गईं। सोमवार को आयुक्त सभागार में आयोजित महिलाओं की विशेष सुनवाईमां पाटेश्वरी शक्ति संवाद उसके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। रामलली ने अपनी पीड़ा अधिकारियों के सामने रखी। उसकी बात सुनते ही आयुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने गंभीरता दिखाई और मौके पर ही करनैलगंज की एसडीएम नेहा मिश्रा को फोन कर तत्काल वरासत में नाम दर्ज कराने के निर्देश दिए।
अधिकारियों की तत्परता का परिणाम यह रहा कि करीब एक घंटे के भीतर नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। वर्षों की पीड़ा से गुजर चुकी रामलली के चेहरे पर पहली बार संतोष और राहत दिखाई दी। इसी प्रकार करनैलगंज तहसील के मंगुरा गांव की रहने वाली ज्ञानवती ने आबादी की जमीन पर कब्जा और रास्ता रोके जाने की शिकायत रखी।
आयुक्त ने मामले को गंभीर मानते हुए एसडीएम को फोन कर तत्काल रास्ता दिलाने के निर्देश दिए। महिलाओं की इस विशेष सुनवाई में कुल 15 महिलाओं ने अपनी समस्याएं रखीं, जिनमें से कई मामलों में मौके पर ही समाधान की पहल की गई। इस दौरान अपर आयुक्त मीनू राणा, वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी चेतना सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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