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Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण जारी, मथुरा में मंदिरों के कपाट बंद; रात आठ बजे से दर्शन देंगे बांकेबिहारी

संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा/मथुरा Published by: Arun Parashar Updated Tue, 03 Mar 2026 05:08 PM IST
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सार

साल का पहला चंद्र ग्रहण जारी है। चंद्र ग्रहण में मंगलवार को मंदिरों के पट बंद रहे। मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में भी दिन में सन्नाटा छाया रहा। रात आठ बजे से बांकेबिहारी मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाएंगे। 
 

Chandra Grahan 2026 Temple doors closed during lunar eclipse
साल का सबसे बड़ा पूर्ण चंद्रग्रहण आज - फोटो : एआई
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विस्तार

चंद्र ग्रहण के प्रभाव के कारण मंगलवार को आगरा और मथुरा में मंदिरों के पट बंद रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में मंदिरों में पूजा-अर्चना और दर्शन नहीं किए जाते। शाम को शुद्धिकरण के बाद मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे। 
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बांकेबिहारी की दर्शन व्यवस्था में बदलाव
तीन मार्च को पड़ने वाले चंद्रग्रहण के चलते ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में दर्शन व्यवस्था में विशेष परिवर्तन किया गया है। ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए मंदिर के कपाट सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक समय तक बंद रहे। श्रद्धालुओं को केवल निर्धारित समय पर ही दर्शन का अवसर मिलेगा। सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक करीब दस घंटे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार प्रातः कालीन दर्शन सीमित अवधि के लिए खुलेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह राजभोग सेवा के तहत सेवायत का निज मंदिर में प्रवेश 05:15 बजे होगा तथा 06:15 बजे दर्शन खुलेंगे। इसके बाद शृंगार आरती 06:25 बजे होगी और 06:30 बजे छींटा देकर दर्शन बंद कर दिए जाएंगे। राजभोग आरती 08:25 बजे होगी, जिसके उपरांत पुनः 08:30 बजे पर्दा बंद कर दिया जाएगा। प्रातः 09:00 बजे सेवायत निज मंदिर से बाहर आ जाएंगे। उसके बाद मंदिर पूरे दिन बंद रहेगा। इसी प्रकार शयनभोग सेवा के अंतर्गत शाम 07:00 बजे सेवायत का प्रवेश होगा जबकि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन 08:00 बजे खोले जाएंगे। रात्रि 09:55 बजे शयन आरती होने के बाद 10:00 बजे छींटा देकर मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे तथा 10:30 बजे सेवायत मंदिर से बाहर आ जाएंगे।
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इन मंदिरों की दर्शन व्यवस्था में भी बदलाव
श्रीराधादामोदर मंदिर के सेवायत कृष्ण बलराम गोस्वामी ने बताया कि सुबह 9 बजे से पहले 4 बजे मंगला आरती के बाद धूप एवं शृंगार आरती की जाएगी। शाम को सात बजे मंदिर के पट खुलने पर गौर पूर्णिमा के अवसर पर ठाकुरजी का अभिषेक, धूप, संध्या और शयन आरती होगी। ठाकुर राधारमण मंदिर के सेवायत पदमलोचन गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर राधारमण मंदिर में भी 3 मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी। चंद्रग्रहण के कारण मंदिर में सुबह की सेवा सुबह 6 बजे तक की जाएगी। इसके बाद मंदिर के पट सुबह 6 से शाम 7 बजे तक 13 घंटे बंद रहेगा। ठाकुरजी की नियमित सेवा, पूजा एवं आरती सूतक काल से पहले और चंद्रग्रहण के बाद मंदिर के धुलाई और शुद्धिकरण के बाद होगी। ज्योतिषाचार्य रामविलास चतुर्वेदी ने बताया कि तीन मार्च को पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण सुबह 3.20 से शाम 6.47 तक चंद्रग्रहण रहेगा। इससे पहले सूतक सुबह 6.20 बजे से लग जाएंगे। सूतक काल में ब्रज के अधिकांश मंदिर बंद रहेंगे। क्यों कि सूतक काल में आराध्य की पूजा सेवा का विधान नहीं है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इस समय पर खुलेंगे पट
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान (श्रीकृष्ण जन्मभूमि) प्रबंधन के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तीन मार्च की शाम खग्रास चंद्रग्रहण होने के कारण सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ सभी मंदिरों के पट खुलेंगे। इसके बाद सुबह छह बजे पट बंद होंगे। चंद्र ग्रहण मोक्ष के उपरांत मंगलवार की शाम 8 बजे सभी मंदिरों के पट उत्थापन आरती के साथ दोबारा एक साथ खुलेंगे। इसके बाद रात्रि 9 बजे नियत समय सभी मंदिरों के पट बंद होंगे। 


 

आगरा में भी मंदिरों के पट बंद
श्रीसंकट मोचन हनुमान मंदिर प्रताप नगर के महंत पंडित जगदीश बाबू भगत  ने बताया कि ग्रहण के प्रारंभ होने से 9 घंटे पहले सूतक लगते है। इसमें मंदिरों के कपाट को बंद किया गया था, जो ग्रहण समाप्ति के बाद शाम करीब 7:30 बजे पुन खोले जाएंगे। चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद शहर के विभिन्न मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। गंगाजल से स्नान और विधि-विधान से पूजन के उपरांत मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही नियमित आरती और पूजा-अर्चना प्रारंभ हो जाएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूतक काल मंगलवार को सुबह 6:20 से आरंभ हुआ। ग्रहण का स्पर्श अपराह्न 03:20 बजे होगा और मोक्ष शाम 06:47 बजे है। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।

गर्भवती महिलाएं करें भजन
ज्योतिषाचार्य पंडित सुभाष शास्त्री ने बताया कि चंद्र ग्रहण से पहले तीन पहर (9 घंटे) तक भोजन का त्याग करना चाहिए। इसका पालन करना शुभ माना जाता है। बालक, वृद्ध और रोगियों को इस नियम में छूट दी गई है। ग्रहण की विकिरणों से रक्षा के लिए भोज्य पदार्थों में कुशा या तुलसी दल अवश्य डालें। विशेषकर गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल में घर के भीतर रहकर भजन करना चाहिए, जिससे गर्भस्थ शिशु पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। सामर्थ्य अनुसार श्वेत वस्तुओं जैसे चावल, दुग्ध तथा चांदी का दान करें। ग्रहण समाप्ति के बाद बिना स्नान किए न तो कोई नित्य कर्म करें और न ही देव-पूजा। स्नान के पश्चात ही शरीर एवं मन की पूर्ण शुद्धि मानी जाती है।
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