Aligarh: कोर्ट ने दिया आदेश, नगर आयुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की प्रक्रिया दो दिन में पूरी करे वादी
नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से 16 फरवरी को तलब किया गया था। मगर नियत तारीख पर नगर आयुक्त अदालत नहीं पहुंचे। इसके बाद अब 18 फरवरी में अदालत ने वादी डिग्रीधारक की नगर आयुक्त को अवमानना में सिविल जेल भेजने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया।
विस्तार
अलीगढ़ नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त डॉ. नंद किशोर और संपत्ति अधिकारी गयूर अहमद पर भुजपुरा की 18 करोड़ रुपये कीमत की भूमि को बेचने के आरोप का जिन्न 10 वर्ष बाद फिर सुर्खियों में है। इस प्रकरण में अवमानना में कारण बताओ नोटिस देकर 16 फरवरी को तलब किए गए नगर आयुक्त अदालत में नहीं पहुंचे। इसके बाद न्यायालय ने तल्ख रुख अपनाया है। इसी क्रम में अब न्यायालय ने प्रक्रिया नगर आयुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की दिशा में बढ़ा दी है। जिसके तहत डिक्रीधारक वादी को आदेश दिया है कि वह दो दिन में विधिक कानूनी प्रक्रिया पूरी करें। ताकि नगर आयुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सके।
इस मामले में सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग की ओर से 12 फरवरी को नगर आयुक्त को यह कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसमें उल्लेख था कि भुजपुरा की जिस भूमि पर 2002 में समझौते के आधार पर डिक्री पारित हुई। उसके बावजूद डिक्रीधारक के स्थान पर नगर निगम का नामांतरण कराकर डिक्री की अवमानना की है। जिसमें सिविल जेल भेजने की अपील करते हुए अवमानना याचिका दायर की। 28 सितंबर 2016 को अवमानना नोटिस जारी कर तीस दिन में नगर निगम का नामांतरण निरस्त कराने व पूर्व स्थिति बहाल करने को कहा गया। मगर आज तक पालन नहीं हुआ।
इस पर नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से 16 फरवरी को तलब किया गया था। मगर नियत तारीख पर नगर आयुक्त अदालत नहीं पहुंचे। इसके बाद अब 18 फरवरी में अदालत ने वादी डिग्रीधारक की नगर आयुक्त को अवमानना में सिविल जेल भेजने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि डिक्री धारक वादी दो दिन में गिरफ्तारी वारंट जारी करने संबंधी विधिक प्रक्रिया पूरी करे। जिसमें गिरफ्तारी से लेकर न्यायालय के समक्ष पेशी व जीवन निर्वाह राशि जमा करना सुनिश्चित करे। ताकि अविलंब गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाना सुनिश्चित हो सके।
इस संबंध में हम अपने कदम पर कायम हैं। पूर्व के सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों ने गलत नीयत से फर्जीवाड़ा व पद दुरुपयोग कर जमीन बेची है। जिसमें दायर हुई अवमानना याचिका के खिलाफ हम जिला न्यायालय व हाईकोर्ट में अपील में गए हैं। निचली अदालत से हमने सभी प्रपत्र जुटा लिए हैं। अब उच्च न्यायालय का जो आदेश होगा, उसे मान्य किया जाएगा। इसी संदर्भ में पुलिस में रिपोर्ट कराने को तहरीर दी है।-प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
पुलिस ने रिपोर्ट पर मांगी विधिक राय
इधर, इस मामले में नगर निगम द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर पर अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। इस मामले में पुलिस स्तर से मामला न्यायालय में विचाराधीन होने व पूर्व सरकारी अधिकारियों पर आरोप होने के चलते विधिक राय ली गई है। सीओ तृतीय सर्वम सिंह ने बताया कि विधिक राय में यह पूछा गया है कि क्या इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है या नहीं। उस राय के मिलने पर रिपोर्ट दर्ज करना तय होगा।
विवाद एक नजर में
- 1990 में जमीन नीलाम करने संबंधी निर्णय पर शुरू हुआ विवाद
- 1991 में भू-स्वामी पक्ष ने इस निर्णय के खिलाफ अपील दायर की
- 2002 में अपील पर नगर निगम-भू स्वामी पक्ष में समझौता व डिग्री
- 2004 में फिर नगर निगम ने जमीन हस्तांतरण के प्रयास शुरू किए
- 2004 में फिर भू-स्वामी ने नगर निगम के खिलाफ अपील दायर की
- 2016 में अपील पर अदालत ने अवमानना का पहला नोटिस जारी किया
- तब से न्यायालय में लगातार इस मामले में चल रही अवमानना