जहां आजकल लोग लग्जरी गाड़ियों और हेलीकॉप्टर से बारात ले जाते हैं, वहीं बुधवार को समस्तीपुर में एक अनोखी बारात देखने को मिली। इस बारात को देखकर लोगों को पुरानी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की याद आ गई।
बाराती बैलगाड़ी से जाते नजर आए। करीब दो किलोमीटर की दूरी बारातियों ने बैलगाड़ी से तय की। बारातियों को ले जाने के लिए 35 बैलगाड़ियों की व्यवस्था की गई थी। इन गाड़ियों को 70 बैल खींच रहे थे। इस बारात में बैंड की जगह पुराने समय में बजने वाले वाद्य यंत्रों से शहनाई की धुन सुनाई दे रही थी। बैलगाड़ी से जाती बारात को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई।
समस्तीपुर दरभंगा पथ पर लगा जाम
बैलगाड़ियों की लंबी कतार के कारण समस्तीपुर दरभंगा पथ पर जाम लग गया। दूल्हे के चाचा महेंद्र प्रधान बारात की व्यवस्था देख रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें पशुओं से बहुत प्रेम है। उन्होंने कहा कि बारात में ज्यादा गाड़ियों का उपयोग होता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने भतीजे की शादी की बारात बैलगाड़ी से ले जाने का फैसला किया। इसके लिए जिले के अलग अलग गांवों से बैलगाड़ियां मंगाई गईं। बारातियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए बैलगाड़ियों पर सोफे भी रखे गए थे। दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर भेजा गया।
होटल कारोबारी की बेटी की थी शादी
जानकारी के अनुसार शहर के मगरदही रोड के एक होटल कारोबारी की बेटी की शादी थी। बारात होटल से दरभंगा रोड स्थित बाजार समिति के पास जानी थी। दोनों जगहों के बीच की दूरी करीब दो किलोमीटर है। कारोबारी के चाचा महेंद्र प्रधान पशु प्रेमी के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें हाथी सहित कई तरह के पशु पालने का शौक है।
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उनके गजराज पैलेस में हाथी के साथ सारस, बंदर, हिरण, खरगोश और कई तरह के चूहे भी हैं। इन पशुओं को देखने के लिए बच्चे अक्सर वहां पहुंचते हैं।
अनोखी बारात से लोगों को हुई परेशानी
इस अनोखी बारात के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को परेशानी भी उठानी पड़ी। एक साथ 32 बैलगाड़ियों के सड़क पर होने से मगरदही पुल से लेकर गणेश चौक तक वाहनों की आवाजाही रुक गई। इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को जाम का सामना करना पड़ा।