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Haryana home devastated by the flames of the Russia-Ukraine war: Yamunanagar's Gurpreet killed in missile strike.
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रूस-यूक्रेन युद्ध की आग में उजड़ा हरियाणा का घर: यमुनानगर के गुरप्रीत की मिसाइल हमले में मौत
इकलौता बेटा था मर्चेंट नेवी का नाविक, छह माह की बेटी के सिर से उठा पिता का साया, शव लाने में लग सकते हैं 10 दिन
यमुनानगर।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए एक भीषण मिसाइल हमले ने हरियाणा के यमुनानगर जिले के गांव पंजेटो के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। गांव निवासी मर्चेंट नेवी के नाविक गुरप्रीत सिंह बाठ की यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास हुए क्रूज मिसाइल हमले में मौत हो गई। गुरप्रीत गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले मर्चेंट वेसल एमवी गोल्डन लियो पर तैनात थे। बताया जा रहा है कि 19 जुलाई की शाम जहाज के ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते ही उस पर क्रूज मिसाइल से हमला कर दिया गया।
हमले में गुरप्रीत सिंह बाठ सहित चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के अनुसार इस हमले में कुल 10 लोगों की जान गई है, जिनमें सीरिया के नागरिक भी शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही गांव पंजेटो में मातम छा गया। परिवार के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। ग्रामीणों की आंखें नम हैं और हर कोई इस दर्दनाक हादसे को लेकर स्तब्ध है।
कंपनी के फोन से मिली बेटे की मौत की खबर
गुरप्रीत के पिता किर्तन सिंह ने बताया कि सोमवार दोपहर कंपनी की ओर से फोन आया, जिसमें उनके बेटे की मौत की सूचना दी गई। यह खबर सुनते ही पूरा परिवार बेसुध हो गया। उन्होंने बताया कि गुरप्रीत करीब डेढ़ माह पहले 12 जून को तुर्की गया था और वहां से मर्चेंट वेसल एमवी गोल्डन लियो पर अपनी ड्यूटी संभाल रहा था।
परिजनों के अनुसार जहाज पर कुल 17 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे। जहाज ने यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अपना निर्धारित सफर शुरू ही किया था कि उस पर क्रूज मिसाइल से हमला कर दिया गया। मिसाइल सीधे जहाज से टकराई, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ और कई चालक दल के सदस्य उसकी चपेट में आ गए। गुरप्रीत इस हमले में जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों में शामिल था।
छह माह की बेटी के सिर से उठा पिता का साया
गुरप्रीत सिंह बाठ परिवार का इकलौता बेटा था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी हुई थी और उसकी छह माह की एक मासूम बेटी है। हादसे के बाद बच्ची के सिर से पिता का साया उठ गया। गुरप्रीत की पत्नी और माता-पिता गहरे सदमे में हैं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कीर्तन सिंह ने बताया कि उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। बेटी ऑस्ट्रेलिया में रहती है, जबकि गुरप्रीत ही परिवार का एकमात्र बेटा था। उसकी कमाई से ही पूरे घर का खर्च चलता था। अब बेटे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पिता की दुर्घटना के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाली
गुरप्रीत के पिता ने बताया कि वर्ष 2016 में उनका सड़क हादसा हो गया था, जिसमें उनकी एक टांग काटनी पड़ी थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह गुरप्रीत के कंधों पर आ गई थी। वह अपने माता-पिता, पत्नी और बेटी का सहारा था। उसकी मेहनत और कमाई से ही घर का गुजारा चलता था। ऐसे में उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को असहाय कर दिया है।
आठ वर्षों से मर्चेंट नेवी में कर रहा था सेवा
परिजनों के अनुसार गुरप्रीत वर्ष 2018 में पहली बार मर्चेंट नेवी के काम से तुर्की गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में वह ईरान गया और वर्ष 2022 में भारत लौट आया। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी हुई। शादी के बाद वह कुछ समय परिवार के साथ रहा और फिर 12 जून 2026 को दोबारा तुर्की जाकर जहाज पर अपनी ड्यूटी संभाल ली थी। परिवार को उम्मीद थी कि करीब नौ महीने बाद वह छुट्टी लेकर घर लौटेगा, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद समाचार आ गया।
शनिवार को हुई थी आखिरी बातचीत
कीर्तन सिंह ने भावुक होकर बताया कि शनिवार रात करीब साढ़े सात बजे उनकी बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। वीडियो कॉल के दौरान गुरप्रीत ने माता-पिता का हालचाल पूछा और अपनी छह माह की बेटी को भी प्यार से देखा। परिवार के किसी सदस्य को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह उनकी अंतिम बातचीत होगी। अब वही वीडियो कॉल परिवार की सबसे बड़ी याद बनकर रह गई है।
शव लाने में लग सकते हैं 10 दिन
परिजनों को मिली जानकारी के अनुसार गुरप्रीत के पार्थिव शरीर को भारत लाने में करीब 10 दिन का समय लग सकता है। परिवार ने केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके बेटे का शव जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए ताकि पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
गुरप्रीत के मामा अमरीक सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इस हमले ने केवल एक परिवार का सहारा ही नहीं छीना, बल्कि पूरे गांव पंजेटो को गहरे शोक में डुबो दिया है। ग्रामीणों ने भी सरकार से मांग की है कि पार्थिव शरीर शीघ्र भारत लाया जाए और परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। गुरप्रीत की मौत ने एक बार फिर युद्ध की विभीषिका और उसके निर्दोष लोगों पर पड़ने वाले दर्दनाक असर को सामने ला दिया है।
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