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Swami Anjaneyulu Yadav, who embarked on a pilgrimage on foot to the 52 Shakti Peethas, has arrived at Jwalamukhi and offered oblations into the sacred fire during a Havan
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Video: 52 शक्तिपीठों की पदयात्रा पर निकले स्वामी अंजन्युल यादव पहुंचे ज्वालामुखी, हवन में डालीं आहुतियां
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और विश्व कल्याण का संदेश लेकर 52 शक्तिपीठों की पदयात्रा पर निकले स्वामी अंजन्युल यादव अपनी शिष्या गीता माता के साथ विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने मां ज्वालामुखी के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा मंदिर में आयोजित हवन-यज्ञ में आहुतियां डालकर देश व विश्व की सुख-समृद्धि की कामना की। ज्वालामुखी पहुंचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं, मंदिर से जुड़े लोगों और गणमान्य व्यक्तियों ने स्वामी अंजन्युल यादव का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उन्हें मां की पावन चुनरी भेंट कर सम्मानित किया गया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने उनके धार्मिक संकल्प और कठिन पदयात्रा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। स्वामी अंजन्युल यादव ने बताया कि उन्होंने 52 शक्तिपीठों के दर्शन का संकल्प लेकर यह पदयात्रा करीब आठ माह पूर्व 26 सितंबर 2025 को बेंगलुरु स्थित चामुंडेश्वरी माता मंदिर से आरंभ की थी। उनका लक्ष्य श्रीलंका से लेकर पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर तक पहुंचकर शक्तिपीठों के दर्शन करना है। उन्होंने बताया कि अब तक वह लगभग 24 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर चुके हैं और 20 राज्यों से गुजरते हुए हिमाचल प्रदेश के ज्वालामुखी धाम पहुंचे हैं। यात्रा के दौरान वह प्रतिदिन लगभग 50 किलोमीटर पैदल चलते हैं तथा गर्मी, सर्दी और वर्षा जैसे कठिन मौसमों का सामना करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। स्वामी अंजन्युल यादव ने बताया कि इससे पहले वह 12 ज्योतिर्लिंगों की भी पैदल यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान जहां भी जाते हैं वहां लोगों को सनातन संस्कृति, सेवा, आध्यात्मिकता और मानव कल्याण का संदेश देते हैं। मां ज्वालामुखी की अखंड ज्योतियों के दर्शन करने के बाद उन्होंने मंदिर की दिव्यता की सराहना करते हुए कहा कि ज्वालामुखी धाम पहुंचकर उन्हें विशेष आत्मिक शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने मां ज्वालामुखी से देश में सुख-शांति, भाईचारे और समृद्धि की प्रार्थना की।
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