नर्मदापुरम जिले के इटारसी क्षेत्र में सोमवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। ग्राम तीखड़ के पास मजदूरों से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर पहाड़ी नदी की पुलिया से नीचे जा गिरी। हादसा इतना अचानक हुआ कि ट्रॉली में बैठे मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। ट्रॉली गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस हादसे में करीब 25 से 30 मजदूर घायल हुए हैं, जिनमें पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सभी मजदूर माना गांव से तिखड़ जमानी क्षेत्र में एक किसान के खेत में मक्का लगाने के लिए जा रहे थे। रोजगार की तलाश में निकले इन मजदूरों को शायद अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में उनका सफर एक दर्दनाक हादसे में बदल जाएगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक चलते समय ट्रैक्टर का अगला हिस्सा अचानक खुल गया। इससे ट्रैक्टर का अगला भाग ऊपर उठ गया और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। देखते ही देखते ट्रैक्टर-ट्रॉली पुलिया से नीचे जा गिरी।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने किया बचाव कार्य
हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने घायल मजदूरों को ट्रॉली से बाहर निकाला और पुलिस व एम्बुलेंस को सूचना दी। कुछ ही देर में 108 एम्बुलेंस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच गई। सभी घायलों को तत्काल इटारसी के शासकीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज शुरू किया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. कमलेश कुमरे के अनुसार चार घायलों के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फ्रैक्चर है, जबकि दो मरीज गंभीर हेड इंजरी से पीड़ित हैं। गंभीर रूप से घायल पांच मरीजों को बेहतर उपचार के लिए नर्मदापुरम जिला चिकित्सालय रेफर किया गया है। अस्पताल में सभी घायलों का इलाज जारी है और डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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सुरक्षा रेलिंग नहीं होने की बात भी सामने आई
प्रारंभिक जानकारी में ट्रैक्टर की तकनीकी खराबी हादसे का प्रमुख कारण मानी जा रही है। वहीं, जिस पुलिया से ट्रैक्टर-ट्रॉली नीचे गिरी, वहां सुरक्षा रेलिंग नहीं होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिया पर रेलिंग होती तो हादसे की गंभीरता कम हो सकती थी। राहत की बात यह रही कि जिस पहाड़ी नदी में ट्रॉली गिरी, उसमें उस समय पानी नहीं था। यदि नदी में पानी भरा होता तो यह हादसा कहीं अधिक भयावह साबित हो सकता था।
डॉ. कमलेश कुमरे ने कहा कि फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। ट्रैक्टर की तकनीकी स्थिति, चालक की भूमिका और हादसे के अन्य कारणों की जांच की जा रही है। यह दुर्घटना एक बार फिर मजदूरों के असुरक्षित परिवहन और सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।