मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिला मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई का एक वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें सुनवाई न होने से नाराज एक पीड़ित व्यक्ति कलेक्टर के सामने ही आत्महत्या करने का प्रयास करता हुआ नज़र आ रहा है, जिसे मौके पर मौजूद गार्ड ने रोका और कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ ने उसे समझाइश दी और उसके प्रकरण में उचित कार्रवाई करने का विश्वास दिलाया, तब कहीं वो जाकर शांत हुआ और अब उसे विश्वास है कि उसकी सुनवाई जरूर होगी।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला नरसिंहगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले मुंडला बजरंग गांव निवासी आत्माराम गुर्जर का है, जो हमेशा की तरह अपने पीएम आवास पर दबंगों के द्वारा किए गए अवैध कब्जे की शिकायत लेकर मंगलवार को जनसुनवाई में अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचे थे। दफ्तरों के चक्कर लगाते हुए आत्मराम इतना दुखी हो चुका था कि जनसुनवाई में उसका नंबर आने से पूर्व ही उसने अपनी जेब से सलफास की गोलियां निकाली और आत्महत्या करने का प्रयास किया, जिसे मौके पर मौजूद गार्ड ने रोका और कलेक्टर ने उसे अपने पास बुलाकर उसकी समस्या सुनी और उसे उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर वह शांत हुआ।
वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान आत्माराम ने कहा कि शशिभूषण नाम के व्यक्ति को उसने अपनी कृषि भूमि बेची थी। लेकिन उसके द्वारा उसके पीएम आवास पर भी कब्जा जमा लिया गया, जिसकी शिकायत वह कई महीने से कर रहा है। लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं की गई। नरसिंहगढ़ एसडीएम मेरे बेटे व परिवार के लोगों को हड़का के भगा देते थे और उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में वह मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में सलफास की गोली साथ लेकर आया था, जिसे वो खुद भी खाता और अपने परिवार को भी खिलाकर आत्महत्या कर लेता।
गौरतलब है कि राजगढ़ जिले में आयोजित जनसुनवाई में एक ही चेहरा कई बार नजर आने का रिवाज काफी पुराना है। क्योंकि किसी की यहां एक बार में सुनवाई होकर निराकरण होना असम्भव जैसा नजर आता है। लेकिन नए कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा के आने के बाद पीड़ितों के अंदर सुनवाई की उम्मीद जगी है, जिसे वे स्वयं ही बयान कर रहे हैं।