सागर में स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) से एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहां इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और चिकित्सा व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक की पहचान देवेंद्र पाठक के रूप में हुई है। परिजनों ने अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि एनेस्थीसिया की ओवरडोज (दवा की अत्यधिक मात्रा) दिए जाने के कारण मरीज की जान गई है।
परिजनों के मुताबिक, देवेंद्र पाठक का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। उपचार की प्रक्रिया के दौरान उन्हें एनेस्थीसिया दिया गया, जिसके तुरंत बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि स्थिति अत्यंत नाजुक होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने समय रहते उचित और आपातकालीन उपचार मुहैया नहीं कराया। अगर वक्त पर सीनियर डॉक्टर या विशेषज्ञ संभाल लेते, तो शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
परिजनों ने उठाए मेडिकल प्रोटोकॉल पर सवाल
घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके। परिजनों ने यह गंभीर सवाल भी उठाया कि यदि मरीज को कोई हाई-रिस्क दवा (जैसे एनेस्थीसिया) दी जा रही थी, तो तय मेडिकल प्रोटोकॉल और डॉक्टरों की सीधी निगरानी सुनिश्चित क्यों नहीं की गई? नर्सिंग स्टाफ के भरोसे मरीज को क्यों छोड़ दिया गया?
डिप्टी सीएम ने लिया संज्ञान, नर्स निलंबित
मामले के तूल पकड़ते ही प्रदेश के डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस दुखद घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, प्राथमिक तौर पर घोर लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित नर्स को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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इस घटना ने एक बार फिर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस मौत के असली जिम्मेदारों पर प्रशासन क्या कड़ा एक्शन लेता है।