सीहोर के श्यामपुर में संचालित आर्यावर्त विश्वविद्यालय की मान्यता अब जांच के घेरे में है। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मान्यता प्राप्त करने के दौरान जिस भवन और आधारभूत संरचना को प्रस्तुत किया, वह वास्तव में रुकमणी देवी पब्लिक स्कूल की इमारत है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ बड़ा छल माना जाएगा। उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता छात्रों और अभिभावकों के विश्वास पर टिकी होती है। ऐसे में मान्यता प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता पूरे तंत्र पर सवाल खड़े कर देती है।
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
मामला तब तूल पकड़ गया जब एबीवीपी नेता भगवान सिंह ने जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय ने निरीक्षण के दौरान फर्जी दस्तावेज और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की। साथ ही स्टाफ नियुक्तियों, कक्षाओं, पुस्तकालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा किया गया। शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने मामले को हल्के में नहीं लिया। तत्काल जांच के निर्देश दिए गए, जिससे साफ है कि प्रशासन इस मुद्दे को लेकर गंभीर है।
13 सदस्यीय टीम करेगी गहन पड़ताल
जांच के लिए 13 सदस्यीय टीम गठित की गई है। इस समिति का गठन पीएम एक्सीलेंस कॉलेज सीहोर के प्राचार्य डॉ. रोहिताश्व कुमार शर्मा के नेतृत्व में किया गया है। टीम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी शामिल हैं। यह समिति विश्वविद्यालय परिसर का भौतिक निरीक्षण करेगी। साथ ही मान्यता से संबंधित सभी दस्तावेज, स्टाफ रिकॉर्ड, नियुक्ति प्रक्रिया, भवन स्वामित्व और अन्य जरूरी कागजातों की बारीकी से जांच करेगी। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट पूरी पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर तैयार की जाए।
दोष सिद्ध हुआ तो रद्द हो सकती है मान्यता
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द की जा सकती है। इतना ही नहीं, प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की भी संभावना है। शिकायतकर्ता ने पहले ही एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है। यह कार्रवाई केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आरोपों को नकारा
इस पूरे विवाद पर आर्यावर्त विश्वविद्यालय के संचालक पुष्पेन्द्र गौतम ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की मान्यता नियमानुसार और पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए प्राप्त की गई है। उन्होंने दावा किया कि संचालन भी नियमों के तहत ही किया जा रहा है। वहीं रुकमणी देवी पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर ब्रजेश पाटीदार ने कहा कि विश्वविद्यालय से संबंधित सभी कार्य पुष्पेंद्र गौतम देखते हैं और वे इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
छात्रों और अभिभावकों में चिंता
इस पूरे घटनाक्रम ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। जिन विद्यार्थियों ने भविष्य की उम्मीदों के साथ यहां प्रवेश लिया, उनके मन में अब असमंजस की स्थिति है। यदि मान्यता पर संकट गहराता है तो पढ़ाई और डिग्री की वैधता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकते। प्रशासन से अपेक्षा है कि जल्द से जल्द स्पष्ट और निष्पक्ष रिपोर्ट सामने आए।
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प्राचार्य ने कही यह बात
जांच समिति के गठन की पुष्टि करते हुए डॉ. रोहिताश्व शर्मा ने कहा कि कलेक्टर के पास शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर टीम बनाई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर बिंदु की बारीकी से जांच कर निष्पक्ष रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी जाएगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दौर में है। शहर में शिक्षा जगत से जुड़े लोग, छात्र और अभिभावक सभी की नजरें अब इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
जांच टीम के घेरे में आर्यावर्त विश्वविद्यालय- फोटो : credit
जांच टीम के घेरे में आर्यावर्त विश्वविद्यालय- फोटो : credit