ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रविवार सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अलौकिक भस्म आरती का आयोजन हुआ। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन और भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद महाकाल के ज्योतिर्लिंग को भस्म रमाई गई। इस मौके पर मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा और हजारों भक्तों ने दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती की पूर्व तैयारी में गर्भगृह में स्थापित सभी देवताओं की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के बाद फूलों की माला पहनाई गई।
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आज के विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल के मस्तक पर सूर्य, चंद्र और त्रिपुंड लगाया गया। साथ ही मोगरे की माला और नवीन मुकुट से भगवान का अलंकरण किया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और कपूर आरती के बाद भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान महाकाल की भक्ति में लीन होकर जयघोष करते रहे।
दान में मिली 1.5 लाख की नगद राशि
श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा आज कुल ₹1,51,000 की नगद राशि दान की गई। राजस्थान के अलवर से आए भक्त प्रीतम सिंह ने ₹1,00,000 नगद राशि मंदिर को भेंट की, वहीं उज्जैन निवासी योगव्रत एवं भूमिका मेहता ने ₹51,000 का दान अर्पित किया। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने दोनों दानदाताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया एवं विधिवत रसीद प्रदान कर सम्मानित किया।
गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर की समस्त व्यवस्थाएं दान के माध्यम से संचालित होती हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर मंदिर में श्रद्धा अनुसार नकद, वस्तुएं या अन्न का दान करते हैं। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित नि:शुल्क अन्नक्षेत्र और गौशाला जैसे सेवा प्रकल्पों में भी श्रद्धालु योगदान देते हैं। समय-समय पर मंदिर अधिकारी, पुजारी व प्रबंध समिति सदस्य भक्तों को दान के लिए प्रेरित करते रहते हैं।