कांवड़ यात्राओं में बढ़ती फूहड़ता, नशे के चलन और तेज आवाज में बजने वाले डीजे को लेकर अब बहस तेज हो गई है। मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया (साध्वी हर्षानंद गिरि) ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कांवड़ यात्राओं के मौजूदा स्वरूप और धार्मिक मर्यादा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
साध्वी हर्षा ने वीडियो में पौराणिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि जिस पवित्र यात्रा का शुभारंभ भगवान परशुराम और रावण ने विशुद्ध भक्ति भाव से किया था, उसे आज कुछ असामाजिक तत्वों ने मनोरंजन का साधन बना दिया है। उन्होंने कांवड़ यात्रा की आड़ में शराब और गांजे के सेवन पर भी गहरी आपत्ति जताई।
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उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान कई जगहों पर शिव-पार्वती का स्वरूप धारण कर अशोभनीय और अश्लील डांस कराया जाता है। साध्वी ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से सनातन धर्म की छवि प्रभावित होती है और सच्चे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं।
साध्वी हर्षा ने कहा कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर लगाम नहीं लगाई गई तो पवित्र धार्मिक परंपरा का स्वरूप बिगड़ सकता है। वह इससे पहले भी संतों के आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रख चुकी हैं।
सरकार से तीन प्रमुख मांगें
नशे पर रोक: कांवड़ यात्रा के दौरान शराब या गांजे का सेवन करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
तेज डीजे पर नियंत्रण: अत्यधिक तेज आवाज वाले डीजे और अनावश्यक रूप से बड़े आयोजनों पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई की जाए।
अशोभनीय प्रस्तुतियों पर प्रतिबंध: शिव-पार्वती का स्वांग रचकर अश्लील डांस कराने वाले मंचों और आयोजनों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
साध्वी हर्षा के इन बयानों के बाद कांवड़ यात्रा की पवित्रता, धार्मिक मर्यादा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।