झालावाड़ जिले का झालरापाटन शहर धार्मिक नगरी के रूप में पहचाना जाता है। यहां स्थित अनेक मंदिरों में तीज-त्योहारों पर विभिन्न आयोजन होते हैं, जो शहर की आध्यात्मिक पहचान को और प्रखर करते हैं। इन दिनों होली पर्व के अवसर पर भगवान द्वारकाधीश मंदिर में विशेष भक्ति का वातावरण देखने को मिल रहा है। रविवार को भगवान द्वारिकाधीश की 64वीं परिक्रमा यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के साथ होली खेलने की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
मंगला आरती के बाद शुरू हुई साढ़े तीन कोसी परिक्रमा
परिक्रमा यात्रा मंगला आरती और पूजा-अर्चना के बाद भगवान द्वारकाधीश मंदिर से प्रारंभ हुई। भगवान रथ में विराजमान थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु अबीर-गुलाल और पुष्पों के साथ होली खेलते हुए साढ़े तीन कोसी परिक्रमा में शामिल हुए। लगभग 10 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को पूरा करने में करीब पांच घंटे लगे। यात्रा में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए 300 जवानों और महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
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ढोल-नगाड़ों और भजन कीर्तन के साथ आगे बढ़ी यात्रा
परिक्रमा यात्रा में सबसे आगे ढोल-नगाड़ों के साथ भगवान द्वारकाधीश की झांकी चल रही थी। इसके पीछे भजन गाती और नृत्य करती महिलाएं शामिल थीं। युवक-युवतियों, पुरुषों और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा पीपली बाजार, नगर पालिका, गिंदौर गेट, दादाबाड़ी और सूरजपोल गेट से होकर सेठों का चौराहा, पुरानी सब्जी मंडी और सूर्य मंदिर पहुंची। वहां से इमली गेट के रास्ते शहर से बाहर निकलते हुए उम्मेदपुरा गांव, कपासियां कुआं, रलायती गांव, वसुंधरा कॉलोनी और विवेकानंद सर्किल से गुजरते हुए पुनः मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में फागुन के गीतों और रंग-गुलाल की बौछार के बीच श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे।
गुलाब और गुलाल की वर्षा से सजा आयोजन
सूर्य मंदिर से इमली गेट तक महिलाओं ने घर-घर आरती उतारी और यात्रियों को नारियल-शक्कर का प्रसाद वितरित किया। श्री बड़ा मंदिर बालाजी सेवा दल और श्री हठीले हनुमान पशुपतिनाथ सेवा दल की ओर से सूर्य मंदिर पर विशेष आयोजन किया गया। इस दौरान सेवादारों ने 100 किलो गुलाब और 50 किलो गुलाल से श्रद्धालुओं और रथ पर पुष्प वर्षा की। भगवान की महाआरती भी संपन्न हुई। यात्रा में झालावाड़ जिले के साथ बारां, कोटा, बूंदी और मध्य प्रदेश के राजगढ़, ब्यावरा, सोयत, सुसनेर और आगर जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।